सीजफायर से दोनों देशों का इनकार :ट्रंप बोले- सरेंडर तक जारी रहेंगे हमले, ईरान बोला- हम भी नहीं रुकेंगे

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग तेज हो गई है। दोनों देशों ने सीजफायर से इनकार कर दिया है। खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की धमकी से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है। ओमान और मिस्र की मध्यस्थता भी फिलहाल नाकाम रही है।
Follow on Google News
ट्रंप बोले- सरेंडर तक जारी रहेंगे हमले, ईरान बोला- हम भी नहीं रुकेंगे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग फिलहाल थमने के कोई संकेत नहीं दे रही है। अमेरिका और ईरान दोनों ने युद्धविराम पर बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्वी देशों की ओर से आए मध्यस्थता के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा है कि, जब तक ईरान सरेंडर नहीं करता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। दूसरी ओर ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि, जब तक अमेरिका और इजरायल के हमले बंद नहीं होते, तब तक वह न तो युद्धविराम करेगा और न ही किसी बातचीत में शामिल होगा।

    ऐसे में ओमान और मिस्र जैसे देशों की शांति कोशिशें फिलहाल नाकाम हो चुकी हैं। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग के 15 दिन में ही हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और वैश्विक तेल बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 

    सीजफायर पर अमेरिका और ईरान दोनों का सख्त रुख

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच युद्धविराम की उम्मीदें लगभग खत्म होती दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि, फिलहाल बातचीत में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है।

    व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए अभियान जारी रखना जरूरी है। अमेरिका का सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी लगातार चल रहा है और इसे रोकने का फिलहाल कोई संकेत नहीं है।

    ट्रंप ने इससे पहले भी कहा था कि, अब बातचीत के लिए बहुत देर हो चुकी है। उनके अनुसार अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था काफी कमजोर हो चुकी है।

    ईरान ने भी युद्धविराम से किया इनकार

    दूसरी ओर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि, वह किसी भी कीमत पर झुकने वाला नहीं है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक जब तक अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले पूरी तरह बंद नहीं करते और भविष्य में सैन्य कार्रवाई खत्म करने की गारंटी नहीं देते, तब तक कोई भी समझौता संभव नहीं है। तेहरान ने यह भी कहा है कि, युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग भी की जाएगी। ईरान की इस सख्त शर्त के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना और भी कम हो गई है।

    यह भी पढ़ें: ईरान : नए सुप्रीम लीडर मुजतबा पूरी तरह स्वस्थ, ब्रिटिश अखबारों में दावा- कोमा में है, एक पैर काटा गया

    ओमान और मिस्र की मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम

    मिडिल ईस्ट के कई देश इस संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। ओमान, जो पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का माध्यम रहा है, उसने दोनों देशों के बीच कई बार संपर्क स्थापित करने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के शुरुआती दिनों में तीन बार बैठकें भी हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। इन बैठकों में ईरान की ओर से शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए थे।

    अमेरिका की ओर से बातचीत में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना भी जताई गई थी। लेकिन अंत में यह वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी। मिस्र ने भी दोनों देशों के बीच संवाद शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल इन प्रयासों में कोई खास सफलता नहीं मिली है।

    खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले से बढ़ा तनाव

    मिडिल ईस्ट में तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हवाई हमला किया। यह द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है क्योंकि देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल भंडार और निर्यात इसी द्वीप से जुड़े हैं। अमेरिकी हमले में यहां कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद ईरान ने इसे अपनी कमजोर नस पर हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    Featured News

    होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी

    ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह बंद कर सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह मार्ग बंद होता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    15 दिन में भारी नुकसान

    28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग ने केवल 15 दिनों में ही भारी तबाही मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस संघर्ष में 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश ईरान के नागरिक बताए जा रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकाने नष्ट हो चुके हैं। दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

    यह भी पढ़ें: Israel-US Iran War; खर्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले का दावा, ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर

    ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बाधित करने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं। अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

    अमेरिका के भीतर भी मतभेद

    इस युद्ध को लेकर अमेरिका के अंदर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारी और ट्रंप के सलाहकार चाहते हैं कि युद्ध जल्द खत्म किया जाए क्योंकि तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आगामी चुनावों पर असर डाल सकती है। वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारी मानते हैं कि, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और संभावित परमाणु हथियार क्षमता को खत्म करने के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

    Breaking News

    US-इजराइल vs ईरान युद्ध: अब तक की टाइमलाइन

    28 फरवरी : अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।

    1 मार्च : ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इजरायल ने पूरे देश में इमरजेंसी घोषित की।

    2 मार्च : अमेरिका और इजरायल ने नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हमला किया।

    3 मार्च : खाड़ी देशों में अमेरिकी दूतावास बंद किए गए। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का फैसला लिया।

    4 मार्च : ईरानी युद्धपोत पर हमले में 104 नौसैनिकों की मौत हुई।

    5 मार्च : ट्रंप ने कहा कि ईरान का नया सुप्रीम लीडर अमेरिका की सहमति के बिना नहीं चुना जाएगा।

    6 मार्च : इजरायल ने ईरान में 400 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

    7 मार्च : अमेरिका ने ईरान के जल संसाधन ढांचे पर हमला किया।

    8 मार्च : अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया।

    9 मार्च : नए सुप्रीम लीडर के घायल होने की खबर सामने आई।

    10 मार्च : ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की 7 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को शरण दी।

    11 मार्च : होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे जहाज पर हमला हुआ।

    12 मार्च : भारत के प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत की।

    13 मार्च : इराक में अमेरिकी एयरफोर्स का रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

    14 मार्च : भारत के LPG लेकर आ रहे दो जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया। अमेरिका ने नए ईरानी सुप्रीम लीडर पर 192 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया।

     

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts