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NSE का बड़ा ऐलान !अगस्‍त से बढ़ जाएगा स्‍टॉक मार्केट का क्‍लोजिंग टाइम

अगस्त 2026 से NSE के फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट में ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ जाएगा। अब बाजार 3:30 बजे की जगह 3:40 बजे बंद होगा। एक्सचेंज का कहना है कि यह बदलाव क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को बेहतर बनाने और कैश व डेरिवेटिव बाजार में बेहतर तालमेल के लिए किया जा रहा है।
अगस्‍त से बढ़ जाएगा स्‍टॉक मार्केट का क्‍लोजिंग टाइम

शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक अहम बदलाव होने जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट के कारोबार समय में बदलाव का ऐलान किया है। नए फैसले के तहत अगस्त 2026 से डेरिवेटिव बाजार पहले के मुकाबले 10 मिनट अधिक समय तक खुला रहेगा। यानी जहां अभी F&O सेगमेंट में कारोबार दोपहर 3:30 बजे तक होता है, वहीं नए नियम लागू होने के बाद यह समय बढ़कर 3:40 बजे तक हो जाएगा। एनएसई का कहना है कि यह बदलाव बाजार के क्लोजिंग सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। इससे कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी। एक्सचेंज ने इस संबंध में बाजार सहभागियों और ब्रोकिंग कंपनियों को आधिकारिक जानकारी भी दे दी है।

अगस्त से लागू होगा नया ट्रेडिंग टाइम

एनएसई द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में सामान्य ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ाया जाएगा। यह बदलाव क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को ध्यान में रखकर किया गया है। हालांकि निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ फ्यूचर एंड ऑप्शन सेगमेंट में लागू होगा। कैश मार्केट के मौजूदा समय में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा प्री-ओपन सेशन और ट्रेड मॉडिफिकेशन विंडो भी पहले की तरह ही काम करेंगी।

आखिर क्या होता है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन?

शेयर बाजार में दिनभर कारोबार होने के बाद बाजार बंद होने से ठीक पहले एक विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसे क्लोजिंग ऑक्शन सेशन कहा जाता है। इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर के आधार पर शेयरों की अंतिम कीमत तय करने में मदद मिलती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, क्लोजिंग प्राइस कई निवेशकों, फंड मैनेजरों और संस्थागत निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी कीमत के आधार पर कई तरह के निवेश निर्णय और मूल्यांकन किए जाते हैं। एनएसई का मानना है कि डेरिवेटिव सेगमेंट में समय बढ़ाने से यह प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित तथा प्रभावी बन सकेगी।

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बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

एक्सचेंज के मुताबिक, कैश मार्केट में लागू क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम और डेरिवेटिव मार्केट के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे दोनों बाजारों में कीमत तय करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतुलित होगी। एनएसई का कहना है कि क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान लागू होने वाले प्राइस बैंड और जोखिम नियंत्रण से जुड़े नियम अब डेरिवेटिव सेगमेंट में भी अधिक प्रभावी तरीके से लागू किए जा सकेंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कारोबार के अंतिम मिनटों में होने वाली असामान्य हलचल पर भी बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

सामान्य निवेशकों के लिए इस बदलाव का सीधा असर बहुत बड़ा नहीं होगा, लेकिन सक्रिय ट्रेडर्स और डेरिवेटिव बाजार में कारोबार करने वालों को अतिरिक्त समय का फायदा मिल सकता है। अंतिम समय में अपनी पोजिशन को एडजस्ट करने या बाजार के क्लोजिंग ट्रेंड को समझने के लिए ट्रेडर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा समय मिलेगा। इससे कई निवेशक अपने फैसले अधिक बेहतर तरीके से ले सकेंगे। हालांकि एक्सचेंज ने यह भी स्पष्ट किया है कि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की क्लोजिंग प्राइस तय करने के मूल सिस्टम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

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VWAP की गणना में होगा बदलाव

एनएसई ने बताया है कि क्लोजिंग वैल्यू तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाली वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) विंडो की गणना अब दोपहर 3:10 बजे से 3:40 बजे के बीच हुए कारोबार के आधार पर की जाएगी। बाजार में VWAP को एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह किसी शेयर या कॉन्ट्रैक्ट की औसत कीमत को कारोबार की मात्रा के साथ जोड़कर दिखाता है। इससे कीमतों का ज्यादा वास्तविक आकलन किया जा सकता है।

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ब्रोकर्स को दिए गए जरूरी निर्देश

एनएसई ने ब्रोकिंग कंपनियों और बाजार सहभागियों को सलाह दी है कि वे समय रहते अपने ट्रेडिंग सिस्टम और कॉन्ट्रैक्ट फाइलों को अपडेट कर लें। ताकि नए नियम लागू होने के बाद किसी तरह की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े। एक्सचेंज का मानना है कि यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक मानकों के और करीब लाने में मदद करेगा। साथ ही बाजार बंद होने के समय कीमत निर्धारण की प्रक्रिया को भी अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाएगा। अगस्त से लागू होने वाला यह नया नियम खासतौर पर डेरिवेटिव बाजार में सक्रिय निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए जरुरी माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें कारोबार के आखिरी चरण में ज्यादा समय और बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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