होर्मुज पर नहीं बनी बात! जेडी वेंस के बयान से मिली राहत की उम्मीद, लेकिन ईरान ने रख दी ऐसी शर्त!

ईरान और अमेरिका के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, ईरान ने स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कई शर्तें रख दी हैं। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रवैये में बदलाव नहीं करता, तब तक होर्मुज को पूरी तरह खोलने पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
अमेरिका बातचीत के साथ रणनीति पर भी कर रहा काम
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि ईरान के मामले में अमेरिका कई स्तरों पर काम कर रहा है। इसमें कूटनीतिक बातचीत के साथ आर्थिक और सैन्य विकल्प भी शामिल हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति होने की बात भी कही। वेंस के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति उस स्तर पर वापस आए, जिस स्तर पर संघर्ष शुरू होने से पहले थी। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से भी ऐसा करने का संकेत दिया गया है। हालांकि, अमेरिका केवल ईरान के बयानों के आधार पर फैसला नहीं करेगा, बल्कि उसके वास्तविक कदमों को भी देखेगा।
होर्मुज में सुरक्षित रास्ता बनाने की तैयारी
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका ऐसे ट्रैफिक सिस्टम पर काम कर रहा है, जिससे स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके। इसके लिए समुद्री मार्ग से बारूदी सुरंगों को हटाने यानी डी-माइनिंग की प्रक्रिया भी जरूरी हो सकती है। अमेरिका का प्रयास है कि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से शुरू हो और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा की आपूर्ति में बड़ी रुकावट न आए।
ईरान ने रखीं स्ट्रेट खोलने के लिए 9 शर्तें
दूसरी ओर, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने नौ प्रमुख शर्तें रख दी हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले अपने व्यवहार में बदलाव करना होगा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, जब तक अमेरिका अपने रुख में सुधार नहीं करता, तब तक स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने पर सहमति नहीं बन सकती।
ईरान की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-
- अमेरिका धमकी देना और अपमानजनक बयान देना बंद करे।
- ईरान और उसके सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई स्थायी रूप से खत्म हो।
- ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए और अमेरिकी सैनिकों की वापसी हो।
- युद्ध से हुए नुकसान के लिए ईरान को 300 अरब डॉलर का मुआवजा दिया जाए।
- ईरान पर लगाए गए सभी अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं।
- विदेशों में मौजूद ईरान की संपत्तियां बिना किसी शर्त के वापस की जाएं।
ईरान को मालवाहक जहाजों पर 7 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिले। - अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- शर्तों का उल्लंघन होने पर जहाजों से 20 प्रतिशत का उल्लंघन शुल्क लिया जाए।
इन मांगों के सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
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ईरान ने अमेरिका को दी दोबारा धमकी न देने की चेतावनी
ईरान के सरकारी प्रसारक ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाघेर जोल्घद्र का बयान भी प्रसारित किया। जोल्घद्र इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर भी हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भविष्य में ईरान को दोबारा धमकी नहीं देनी चाहिए। इसके अलावा अमेरिका को ईरान और क्षेत्र में उसके सशस्त्र सहयोगियों के खिलाफ चल रहे युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करना होगा। इस बयान से साफ है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के मुद्दे को व्यापक राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों से जोड़कर देख रहा है।
अस्थायी समुद्री रास्ते पर समझौते के करीब ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत में शामिल पक्ष फारस की खाड़ी में आने-जाने वाले जहाजों के लिए एक अस्थायी समुद्री रास्ता तैयार करने के करीब पहुंच गए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अस्थायी समझौते का मतलब यह नहीं है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इसका मतलब है कि आने वाले समय में जहाजों की आवाजाही में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी पूरी स्थिति अभी सामान्य होने में समय लग सकता है।
ओमान की मध्यस्थता से बातचीत आगे बढ़ी
इस पूरे मामले में ओमान की भूमिका भी अहम है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है। ओमान ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उसने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचना चाहिए, जिससे बातचीत के दौरान हुई प्रगति को नुकसान पहुंचे। ओमान की कोशिश है कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकालें, जिससे समुद्री यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखा जा सके।
ADNOC के जहाज पर मिसाइल हमला
इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी सुरक्षा स्थिति को लेकर एक और घटना सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC के एक जहाज को शनिवार तड़के मिसाइलों से निशाना बनाया गया। यह हमला उस समय हुआ जब जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है। UAE की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी के तीन अन्य जहाजों को भी इसी सप्ताह निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
पूरी दुनिया की नजर होर्मुज पर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का असर तेल और गैस की कीमतों के साथ-साथ दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका सुरक्षित समुद्री रास्ता तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट खोलने से पहले अपनी शर्तें सामने रख दी हैं। ओमान की मध्यस्थता से बातचीत जरूर आगे बढ़ रही है, लेकिन होर्मुज पूरी तरह कब खुलेगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।











