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US Iran Deal:ईरान-अमेरिका डील से किसकी बढ़ी टेंशन? खाड़ी देशों को क्यों सता रही चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते ने सैन्य तनाव को कम करने की दिशा में राहत जरूर दी है, लेकिन इससे खाड़ी देशों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। समझौते में परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है, जबकि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों को इससे बाहर रखा गया है। यही पहलू अब क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
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ईरान-अमेरिका डील से किसकी बढ़ी टेंशन? खाड़ी देशों को क्यों सता रही चिंता

समझौते के बाद खाड़ी देशों ने मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि इन हथियारों पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं होने से भविष्य में सुरक्षा चुनौतियां बनी रह सकती हैं। प्रतिबंधों में संभावित ढील से ईरान की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना भी जताई जा रही है।

समझौते से तनाव घटा 

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने हालिया संघर्ष को शांत करने में अहम भूमिका निभाई है। इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर सहमति बनी है। हालांकि, इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों को शामिल नहीं किया गया। यही कारण है कि खाड़ी देशों को लग रहा है कि उनकी प्रमुख सुरक्षा चिंताओं का पर्याप्त समाधान अभी भी नहीं हो सका है।

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खाड़ी देशों ने जताई चिंता 

हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई रणनीतिक ठिकानों, ऊर्जा परियोजनाओं और सैन्य प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि तेहरान की मिसाइल और हवाई क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर इन हथियार प्रणालियों पर कोई सीमा तय नहीं की गई, तो भविष्य में क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका बनी रह सकती है। 

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बैलिस्टिक मिसाइल या ड्रोन क्षमताओं पर कोई प्रतिबंध नहीं 

समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान ने भी चर्चा तेज कर दी, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान को सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें रखने की अनुमति दी जा सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले ही कह चुके थे कि ईरान की मिसाइल क्षमता को नियंत्रित करना अमेरिका की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। दोनों नेताओं के अलग-अलग रुख ने अमेरिका की भविष्य की नीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 

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ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में छूट 

समझौते के तहत ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में कुछ छूट मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे ईरान के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है और उसे आर्थिक मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त सैन्य ढांचे को दोबारा ठीक करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसी कारण कई देश आशंका जता रहे हैं कि आर्थिक राहत का असर ईरान की सैन्य क्षमताओं पर भी पड़ सकता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर बनी हुई है बहस

समझौते के आलोचकों का कहना है कि यदि मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों पर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं लगाए जाते, तो भविष्य में इन हथियारों का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। उनका तर्क है कि आर्थिक संसाधनों में वृद्धि के साथ ईरान अपने रक्षा कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। वहीं समर्थकों का मानना है कि फिलहाल समझौते ने बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका को टालने का काम किया है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े बाकी मुद्दों पर दोनों पक्ष किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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