सिंहस्थ-2028 की राह में कानूनी रोड़ा हटा, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; 3 मेगा प्रोजेक्टों पर अब आगे बढ़ सकेगा निर्माण

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मध्य प्रदेश के लिए बड़ी खबर सामने आई है। इंदौर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सिंहस्थ से जुड़े तीन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में जमीन अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने 31 अगस्त को इन मामलों में फैसला सुनाया। इन परियोजनाओं में उज्जैन सिंहस्थ बायपास का चौड़ीकरण, इंदौर-उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोर-लेन रोड और हरिफाटक फोर-लेन रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) शामिल हैं। इन मामलों में जमीन अधिग्रहण और कब्जे की प्रक्रिया रोकने की मांग की गई थी। अदालत के फैसले के बाद संबंधित अंतरिम रोक और यथास्थिति के आदेश हट गए हैं। इससे इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
तीन अहम प्रोजेक्टों पर हटे कानूनी अड़ंगे
सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और कनेक्टिविटी से जुड़े कई बड़े काम किए जा रहे हैं। इन तीन परियोजनाओं को भी इसी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जमीन अधिग्रहण को लेकर कुछ जमीन मालिकों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे से जुड़ी आपत्तियां उठाई गई थीं। हाई कोर्ट ने इन याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ किया कि यदि किसी जमीन मालिक को मुआवजे या अवॉर्ड को लेकर आपत्ति है, तो उसके लिए कानून में अलग प्रक्रिया मौजूद है। ऐसे मामलों में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 64 के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाया जा सकता है।
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ग्रीनफील्ड फोर-लेन रोड में क्या हुआ?
इंदौर-उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोर-लेन रोड से जुड़े मामले में बड़ी संख्या में जमीन मालिक प्रभावित हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट से करीब 1,568 प्रभावित लाभार्थी जुड़े थे। इनमें से 1,300 से ज्यादा लोगों ने अवॉर्ड और मुआवजा स्वीकार कर लिया था। कुछ लोगों की ओर से अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे और परियोजना को रोकने की मांग की गई थी। अदालत ने माना कि जिन प्रक्रियागत कमियों की बात याचिकाओं में कही गई है, वे इतनी गंभीर नहीं हैं कि पूरे जमीन अधिग्रहण को ही रद्द कर दिया जाए। अदालत ने परियोजना के सार्वजनिक महत्व और सिंहस्थ-2028 की समय सीमा को भी ध्यान में रखा। इससे ग्रीनफील्ड रोड के काम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हरिफाटक ROB मामले में भी राहत
हरिफाटक फोर-लेन रेलवे ओवर ब्रिज यानी ROB से जुड़े मामले में भी हाई कोर्ट ने परियोजना को रोकने से इनकार कर दिया। अदालत के सामने रिकॉर्ड में यह जानकारी थी कि करीब 4.81 करोड़ रुपए का मुआवजा कलेक्टर के पास जमा कराया जा चुका है। कुछ जमीन मालिकों ने मुआवजे से जुड़े मुद्दे उठाए थे। कोर्ट ने कहा कि मुआवजे को लेकर विवाद है तो उसके लिए कानून में उपलब्ध अलग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। केवल मुआवजे के विवाद के आधार पर पूरे सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को रोकना उचित नहीं होगा।
उज्जैन की कनेक्टिविटी को मिलेगा फायदा
इन तीनों परियोजनाओं का सिंहस्थ-2028 के लिहाज से खास महत्व है। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में शहर की सड़क व्यवस्था और बाहर से आने-जाने वाली कनेक्टिविटी को मजबूत करना जरूरी है। बायपास के चौड़ीकरण से ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर करने में मदद मिल सकती है। वहीं ग्रीनफील्ड फोर-लेन रोड उज्जैन को दूसरे प्रमुख शहरों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।
प्रशासन के सामने समय पर काम पूरा करने की चुनौती
हाई कोर्ट से कानूनी अड़चन कम होने के बाद अब निगाहें प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसियों पर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोक हटने के बाद जमीन पर काम कब से शुरू होगा। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि कितने जमीन मालिकों का मुआवजा अभी लंबित है और किन हिस्सों में कब्जे की प्रक्रिया बाकी है।
सिंहस्थ की तैयारियों के लिए अहम फैसला
हाई कोर्ट के ये फैसले केवल जमीन अधिग्रहण से जुड़े कानूनी मामलों तक सीमित नहीं हैं। इनका सीधा असर सिंहस्थ-2028 की इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारियों पर पड़ सकता है। तीन बड़े प्रोजेक्टों पर लगी न्यायिक रोक या अनिश्चितता कम होने से सड़क चौड़ीकरण, ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी और रेलवे ओवर ब्रिज के काम को गति मिलने की संभावना है।


















