दमोह में पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र पर बड़ी राहत! आवेदन नहीं होंगे निरस्त, कलेक्टर ने दिए निर्देश
दमोह। दो साल से ज्यादा पुराने जन्म और मृत्यु पंजीयन के मामलों में परेशान लोगों को दमोह जिला प्रशासन से बड़ी राहत मिली है। जिला रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु एवं जिला योजना अधिकारी ने जिले के सभी तहसीलदारों को इस संबंध में पत्र जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल ऐसे आवेदन निरस्त नहीं किए जाएं। 31 अगस्त को हुई टीएल बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि राज्य शासन से स्पष्ट आदेश आने तक धारा 13(3) के अंतर्गत मिलने वाले आवेदनों पर नियमानुसार अनुज्ञा आदेश जारी किए जाएं। इससे पुराने प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को लेकर बनी उलझन कम होने की उम्मीद है।
तहसील में आवेदन खारिज होने से बढ़ी थी परेशानी
लोकसेवा केंद्रों के जरिए जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए लगातार आवेदन पहुंच रहे थे। इनमें दो साल से अधिक पुराने मामलों को कई जगहों पर निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे आवेदकों में यह सवाल खड़ा हो गया था कि पुराने पंजीयन के लिए अब किस अधिकारी के पास जाना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इस स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही थी। कई परिवार वर्षों पुराने जन्म या मृत्यु रिकॉर्ड को सही कराने या नया प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे।
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पीपुल्स समाचार ने उठाया था मामला
पुराने जन्म-मृत्यु पंजीयन की समस्या को पीपुल्स समाचार ने 26 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर में बताया गया था कि दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने के कारण लोगों की दिक्कत बढ़ रही है। तहसील स्तर पर आवेदन निरस्त होने के बाद आवेदक यह समझ नहीं पा रहे थे कि आगे की कार्रवाई कहां और किस तरह करनी है। इसी बीच केंद्र सरकार के नए राजपत्र के बाद नियमों को लेकर स्थिति में बदलाव सामने आया।
छह अगस्त के राजपत्र में बदला प्रावधान
भारत सरकार ने 6 अगस्त 2026 को रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ से जुड़े संशोधित प्रावधान का राजपत्र जारी किया। इसके अनुसार दो साल के बाद जन्म या मृत्यु की सूचना देने पर पंजीयन प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए संबंधित मजिस्ट्रेट का क्षेत्राधिकार उसी स्थान से जुड़ा होना जरूरी है, जहां जन्म या मृत्यु हुई है। आदेश जारी होने से पहले रिकॉर्ड की सही जानकारी का सत्यापन और तय शुल्क जमा करने की प्रक्रिया भी जरूरी होगी।
दो साल तक देरी पर भी बदला तरीका
संशोधित व्यवस्था में दो साल तक विलंब से दी गई सूचना के लिए भी प्रक्रिया तय की गई है। ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, अनुविभागीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद पंजीयन किया जा सकेगा। फिलहाल राज्य शासन के स्पष्ट निर्देशों का इंतजार है। दमोह कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि तब तक धारा 13(3) के तहत आने वाले मामलों को केवल नए प्रावधानों की अस्पष्टता के आधार पर खारिज न किया जाए। इससे नागरिकों को पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में राहत मिलने की संभावना है।
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प्रमाणपत्र कई जरूरी कामों के लिए जरूरी
जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र आज कई सरकारी और निजी कामों में जरूरी दस्तावेज हैं। आधार, पेंशन, बैंकिंग, संपत्ति से जुड़े काम और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में वर्षों पुराने रिकॉर्ड का समय पर पंजीयन नहीं होने से परिवारों के जरूरी काम अटक सकते हैं। प्रशासन के नए निर्देश से फिलहाल आवेदकों को राहत मिली है। अब राज्य शासन के अगले आदेश के बाद प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्थिति और ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
EDIT BY: ADITI RAWAT





















