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उज्जैन : स्कूल टाइमिंग पर सियासत, महाकाल सवारी के चलते छुट्टी में किया गया बदलाव, कांग्रेस विधायक ने जताई आपत्ति

उज्जैन : स्कूल टाइमिंग पर सियासत, महाकाल सवारी के चलते छुट्टी में किया गया बदलाव, कांग्रेस विधायक ने जताई आपत्ति

उज्जैन। सावन महीने में निकलने वाली महाकाल सवारी को लेकर उज्जैन जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने आदेश जारी करते हुए कहा कि जुलाई और अगस्त में महाकाल की सवारी वाले सोमवार को शहर के सरकारी और निजी स्कूल बंद रहेंगे, जबकि इसके बदले रविवार को स्कूल संचालित किए जाएंगे। यह फैसला कक्षा 1वीं से 12वीं तक के सभी स्कूलों पर लागू होगा।

कौन-कौन सी तारीखों को होगा बदलाव

नगरीय क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों में 14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई, 4 अगस्त और 11 अगस्त को सोमवार के दिन अवकाश रहेगा। इसके बदले 13 जुलाई, 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त और 10 अगस्त को रविवार के दिन स्कूल खुले रहेंगे। ।

सवारी के दिन ट्रैफिक से राहत देने की कोशिश

प्रशासन का कहना है कि सावन में हर सोमवार महाकाल मंदिर से निकलने वाली सवारी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। सवारी के चलते शहर की कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग प्रतिबंध, और सुरक्षा प्रबंध लागू रहते हैं। इस स्थिति में छात्रों को स्कूल पहुंचने में परेशानी होती है। इसलिए यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुविधा और स्कूल आने-जाने वालों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने जताई आपत्ति

कलेक्टर के इस आदेश पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल की सवारी कोई नई परंपरा नहीं है, यह सालों से निकलती रही है। फिर अब पहली बार स्कूलों की छुट्टी क्यों? अगर दूसरे धर्म के लोग भी धार्मिक कारणों से छुट्टी मांगें तो क्या उन्हें भी मिलेगी? देश संविधान से चलता है, किसी एक धर्म से नहीं। लगता है कलेक्टर ने मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए यह आदेश दिया है।

बीजेपी ने किया पलटवार

आरिफ मसूद के बयान पर राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब दिया। उन्होंने कहा किआरिफ मसूद जैसे लोगों पर टिप्पणी करना समय की बर्बादी है। भारत की आत्मा सनातन परंपराओं से जुड़ी है। उज्जैन में महाकाल बाबा की शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत है। सरकार का यह फैसला युवाओं को परंपरा से जोड़ने के लिए है।

Vaishnavi Mavar
By Vaishnavi Mavar

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