अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए हनुमान जी... मंदिर टूटा, लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा हटाने में मशीनें भी फेल

उज्जैन। सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने हनुमान मंदिर का भवन तो तोड़ दिया गया, लेकिन मंदिर में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। आधुनिक मशीनों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। मामला कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग का है। सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले शहर के पुराने हिस्से में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था सुधारने का काम चल रहा है। इसी काम की जद में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन आया था।
मंदिर का भवन हटा, प्रतिमा नहीं
प्रशासन ने मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा हटा दिया। इसके बाद हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई। प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई। इंदौर से इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई। विशेषज्ञों ने दो दिन तक प्रतिमा के आधार और आसपास की संरचना को समझा और उसे हटाने का प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की तकनीक तय करने की तैयारी कर रहा है।
प्रतिमा के नीचे डेढ़ फीट तक खोदाई
प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए प्रशासन की ओर से करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा भी खोदा गया है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रतिमा किस तरह स्थापित है और उसके नीचे की संरचना कैसी है। प्रशासन के मुताबिक प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करना प्राथमिकता है। प्रस्तावित तौर पर प्रतिमा को टंकी चौक पर स्थापित करने की योजना बताई जा रही है।
श्रद्धालुओं ने किया विरोध, महाआरती भी हुई
प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जानकारी स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों तक पहुंचने के बाद विरोध शुरू हो गया। मंगलवार शाम मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। यहां महाआरती की गई, ढोल-ताशे बजाए गए और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि कई कोशिशों के बाद भी जब प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली तो प्रशासन को इसे हटाने का फैसला दोबारा देखना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन प्रतिमा को हटाना ही एकमात्र रास्ता नहीं होना चाहिए।
पुजारी ने मांगी लिखित गारंटी
मंदिर के पुजारी सुलभ शांतनु शर्मा और मंदिर समिति के सदस्यों ने भी प्रतिमा हटाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मंदिर के दोनों तरफ सड़क मौजूद है, इसलिए प्रशासन को सड़क की योजना पर दोबारा विचार करना चाहिए। पुजारी की मांग है कि अगर प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करना है तो पहले लिखित में गारंटी दी जाए कि प्रतिमा को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद ही प्रतिमा को हटाने की अनुमति दी जाएगी।
170 साल पुराना बताया जा रहा मंदिर
उज्जैन के इतिहास और धार्मिक स्थलों के जानकार भगवती लाल राजपुरोहित के मुताबिक मंदिर की उम्र करीब 170 वर्ष बताई जा रही है। प्रतिमा पर लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण उसकी मूल आकृति और भाव-भंगिमा पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देती। प्रतिमा के न हटने के बाद स्थानीय श्रद्धालु इसे भगवान हनुमान की इच्छा मान रहे हैं। वहीं प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ इसे धार्मिक मान्यता के बजाय तकनीकी और संरचनात्मक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। अब प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और श्रद्धालुओं की भावनाओं, दोनों के बीच रास्ता निकालने की चुनौती है।




















