Twisha Sharma Death Case:हाईकोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द, रात 1 बजे के बाद आया फैसला

ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता, गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट्स को देखते हुए शुरुआती जांच में राहत देना सही नहीं था। कोर्ट ने यह भी माना कि मृतका पर मानसिक दबाव और गर्भपात कराने के आरोप गंभीर हैं।
Follow on Google News
हाईकोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की रद्द, रात 1 बजे के बाद आया फैसला
फाइल फोटो

जबलपुर। ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने करीब पौने तीन घंटे चली सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा था, जिसे देर रात जारी किया गया। कोर्ट ने कहा कि मामले में सामने आए सबूत, गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि जांच के शुरुआती दौर में निचली अदालत द्वारा दी गई राहत उचित नहीं थी। इस फैसले के बाद अब CBI के सामने गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है।

हाईकोर्ट ने क्यों पलटा अदालत का फैसला?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भोपाल की निचली अदालत ने मामले के कई अहम पहलुओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि जिस समय अग्रिम जमानत दी गई थी, उस समय जांच शुरुआती चरण में थी और कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आना बाकी थे। ऐसे में आरोपी को राहत देना सही फैसला नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री यह दिखाती है कि मामला केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं है बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द कर दिया।

Twitter Post

व्हाट्सऐप चैट्स बने मामले का आधार

सुनवाई के दौरान मृतका ट्विशा शर्मा के परिवार की तरफ से कई व्हाट्सऐप चैट्स अदालत में पेश की गईं। इन चैट्स में ट्विशा ने अपने परिवार को बताया था कि ससुराल पक्ष उस पर लगातार शक करता था और मानसिक रूप से परेशान करता था। अदालत ने माना कि चैट्स में जो बातें सामने आई हैं, वे केवल पति के खिलाफ नहीं बल्कि गिरिबाला सिंह के खिलाफ भी संकेत देती हैं। कोर्ट ने कहा कि इन संदेशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि ये मृतका की मानसिक स्थिति और पारिवारिक माहौल को दर्शाते हैं।

ये भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case : हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार का दावा, मौत से पहले हुई थी मारपीट

गर्भपात के दबाव को लेकर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद बयानों से यह बात सामने आती है कि ट्विशा शर्मा पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया जा रहा था। अदालत ने माना कि गवाहों के बयान इस ओर इशारा करते हैं कि सास और पति दोनों उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि एक नवविवाहित महिला पर इस तरह का दबाव गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर आरोपों को केवल सामान्य पारिवारिक विवाद नहीं माना जा सकता।

शादी के कुछ महीनों बाद हुई थी मौत

ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही 12 मई 2026 को उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। पुलिस को ट्विशा का शव फांसी पर लटका मिला था, जिसके बाद कटारा हिल्स थाने में मामला दर्ज किया गया। मृतका के परिवार ने दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और गर्भपात के लिए दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए थे। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

ये भी पढ़ें: Twisha Sharma Case : CBI ने मांगी ट्विशा की सास गिरिबाला की कस्टडी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

CBI ने कोर्ट में क्या कहा

सुनवाई के दौरान CBI ने भी अदालत को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष पूरी तरह सहयोग नहीं कर रहा था और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है। CBI की दलीलों पर अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और ऐसे समय में आरोपियों को मिली राहत जांच को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से अदालत ने अग्रिम जमानत रद्द करना जरूरी माना।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts