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वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गाबार्ड ने शुक्रवार को ओबामा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत को गलत तरीके से रूस के साथ जोड़ा गया। उन्होंने इस पूरे मामले को राष्ट्रद्रोही साजिश बताते हुए कहा कि इसमें शामिल लोगों पर मुकदमा चलना चाहिए।
तुलसी गाबार्ड ने अपने बयान में आरोप लगाया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी जैसे कि पूर्व डीएनआई जेम्स क्लैपर, सीआईए डायरेक्टर जॉन ब्रेनन, एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी आदि ने जानबूझकर झूठी खुफिया जानकारी तैयार की ताकि ऐसा दिखाया जा सके कि रूस ने 2016 का चुनाव ट्रंप के पक्ष में प्रभावित किया।
गाबार्ड ने कहा, “अब अमेरिकी जनता को सच्चाई पता चलेगी कि किस तरह 2016 में खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया गया।”
नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिस की एक 114 पेज की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के चुनाव से पहले तक खुफिया एजेंसियों का यह मानना था कि रूस की ओर से चुनाव में साइबर हमलों के जरिए असर डालने की कोशिश नहीं की जा रही थी।
8 दिसंबर 2016 को प्रेसिडेंट डेली ब्रीफ के ड्राफ्ट में भी कहा गया था कि रूस के साइबर हमलों से अमेरिकी चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन यह रिपोर्ट बाद में अचानक वापस ले ली गई और कभी सार्वजनिक नहीं की गई।
गाबार्ड का दावा है कि 9 दिसंबर 2016 को ओबामा ने एक अहम बैठक बुलाई जिसमें सीआईए, एफबीआई, और एनएसए के शीर्ष अधिकारी शामिल थे। इसी बैठक में कथित तौर पर यह निर्देश दिया गया कि एक नई खुफिया रिपोर्ट तैयार की जाए जिसमें रूस की चुनाव में दखल का आरोप हो।
गाबार्ड के अनुसार, “यह नई रिपोर्ट पहले से चली आ रही खुफिया एजेंसियों की राय के बिल्कुल उलट थी। यह राष्ट्रपति के निर्देश पर एक नई कहानी गढ़ने की कोशिश थी।”
गाबार्ड ने ओबामा प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने मीडिया को झूठी और गोपनीय जानकारी लीक की ताकि रूस को दोषी ठहराया जा सके। उन्होंने कहा, “वॉशिंगटन पोस्ट और दूसरे बड़े मीडिया संस्थानों में झूठी खबरें फैलाई गईं जिनमें बताया गया कि रूस ने चुनाव हैक किया।”
गाबार्ड ने कहा कि 6 जनवरी 2017 को जो अंतिम खुफिया रिपोर्ट जारी की गई, वह भरोसेमंद नहीं थी और इसमें उस स्टील डॉसियर का इस्तेमाल किया गया जिसे पहले ही गलत माना जा चुका था। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर ट्रंप के खिलाफ म्यूलर जांच, महाभियोग और अन्य कार्रवाइयां शुरू हुईं। उन्होंने मांग की कि जो लोग इस साजिश में शामिल थे, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाए।
गाबार्ड ने यह भी कहा कि उन्होंने सारे सबूत अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) को सौंप दिए हैं ताकि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जा सके। उन्होंने कहा, “अमेरिकी जनता का लोकतंत्र पर भरोसा इसी से जुड़ा है। ट्रंप, उनके परिवार और अमेरिकी नागरिकों को न्याय मिलना जरूरी है।”