ट्रंप ने जारी किया ‘होर्मुज मैप’,‘New US Territory’ लिखकर किया शेयर, स्ट्रेट को बताया अमेरिका का ‘नया इलाका’!

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक मैप शेयर करते हुए इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को अमेरिका का ‘नया इलाका’ बताया है। ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर मैप शेयर करते हुए लिखा, “न्यू यूएस टेरिटरी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज।” उनके इस पोस्ट के बाद मिडिल ईस्ट में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, किसी समुद्री क्षेत्र को किसी देश का हिस्सा घोषित करना केवल सोशल मीडिया पोस्ट से संभव नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय देशों के अधिकारों से जुड़ी है। ऐसे में ट्रंप के इस दावे को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर है।
आखिर क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यह ईरान और ओमान के बीच आता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के कई देशों के लिए यह रास्ता इसलिए अहम है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस समुद्री जहाजों के जरिए दूसरे देशों तक पहुंचाई जाती है। इस समुद्री रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ट्रंप पहले भी कर चुके हैं ऐसा दावा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप का यह पहला बयान नहीं है। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द अमेरिका का इलाका घोषित किया जाएगा। इसके कुछ दिन बाद 18 अगस्त को भी ट्रंप ने इसी तरह का मैप सोशल मीडिया पर शेयर किया था। अब एक बार फिर उन्होंने इस दावे को दोहराते हुए मैप पोस्ट किया है। लगातार सामने आ रहे इन बयानों के कारण यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
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अमेरिका और ईरान के बीच क्यों है विवाद?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। अमेरिका का कहना रहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखा जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आवाजाही प्रभावित न हो। वहीं ईरान इस क्षेत्र को अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है। ईरान का रुख रहा है कि इस इलाके में उसकी भूमिका और नियंत्रण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी कई बार तेज हो चुकी है।
ईरान ने ट्रंप के दावे पर जताई आपत्ति
ट्रंप के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने वाले दावे पर ईरान पहले ही नाराजगी जता चुका है। ईरान ने अमेरिकी दावे की आलोचना करते हुए गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका इस क्षेत्र को लेकर एकतरफा दावा नहीं कर सकता। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति के बीच होर्मुज को लेकर इस तरह की बयानबाजी ने चिंता बढ़ा दी है।
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आवाजाही होती है। अगर किसी कारण से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से कई देशों में पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर महंगाई और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका का हिस्सा बनेगा होर्मुज?
ट्रंप के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका वास्तव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना अधिकार स्थापित करने की कोशिश करेगा। फिलहाल ट्रंप के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कोई स्पष्ट कानूनी या आधिकारिक प्रक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका इस क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेने के लिए कोई औपचारिक कदम उठाएगा।




















