33% आरक्षण, लेकिन कुर्सी तक नहीं! BJP विधायक को खुद लगानी पड़ी कुर्सी, फिर कही बड़ी बात

गुना। मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं की भागीदारी को लेकर अक्सर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन गुना में एक कार्यक्रम के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक महिला विधायक को मंच पर बैठने के लिए अपनी कुर्सी खुद लगानी पड़ी। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। कार्यक्रम के दौरान महिला जनप्रतिनिधियों को मंच पर बैठने की उचित जगह नहीं मिलने से कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई। बाद में विधायक ने मंच से अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान का कार्यक्रम
मामला गुना के शुभ विदाई गार्डन में आयोजित गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान से जुड़ा है। कार्यक्रम में सामाजिक समानता, समरसता और सद्भाव का संदेश दिया जा रहा था। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर स्थिति बिगड़ गई। चांचौड़ा की भाजपा विधायक प्रियंका मीना और नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता को मंच पर बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली। आयोजकों की ओर से व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई, लेकिन मंच की पहली पंक्ति में पहले से बैठे कुछ वरिष्ठ नेता अपनी जगह से नहीं उठे। इसके चलते महिला जनप्रतिनिधियों को काफी देर तक असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
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विधायक ने खुद खींचकर लगाई कुर्सी
काफी इंतजार के बाद जब स्थिति नहीं बदली तो विधायक प्रियंका मीना ने खुद ही एक कुर्सी खींचकर मंच पर लगा ली। इसके बाद वे उसी कुर्सी पर बैठीं। इसी तरह नगर पालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता भी मंच पर असहज नजर आईं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों और मंच पर बैठे कार्यकर्ताओं के सामने यह पूरा घटनाक्रम हुआ। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। लोग मंच की व्यवस्था और महिला जनप्रतिनिधियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
मंच से छलका विधायक का दर्द
कार्यक्रम के दौरान विधायक प्रियंका मीना ने इस घटना को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने महिलाओं को मिले राजनीतिक आरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि 33 फीसदी आरक्षण मिला है, लेकिन मंच पर कुर्सी तक नहीं मिलती। विधायक के इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान भी इस घटना की ओर गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर महिला जनप्रतिनिधियों को मंच पर ही सम्मान और बराबरी की जगह नहीं मिलती, तो महिला सशक्तिकरण की बात कितनी प्रभावी है?
‘समरसता’ के मंच पर असमानता की तस्वीर?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देना था। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर सामने आई बैठने की व्यवस्था ने पूरे आयोजन को लेकर एक अलग ही चर्चा शुरू कर दी। एक तरफ मंच से समानता और सद्भाव की बातें कही जा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ महिला जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिलना लोगों को खटक गया। हालांकि, इस पूरे मामले में आयोजकों की ओर से जानबूझकर ऐसा किए जाने या किसी भेदभाव की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। लेकिन वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा जरूर छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘कुर्सी वाला वीडियो’
घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो में महिला विधायक को मंच पर अपनी कुर्सी खुद लगाते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद उनके बयान ने इस पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया।




















