भारत से निकलकर दुनिया पर छाए हिंदुस्तानी,जानिए किस देश में रहते हैं सबसे ज्यादा भारतीय

रोजगार, शिक्षा, कारोबार और बेहतर जीवन की तलाश में भारतीय दशकों से विदेशों का रुख करते रहे हैं। समय के साथ लाखों भारतीय दूसरे देशों में बस गए और वहां की अर्थव्यवस्था, राजनीति, शिक्षा तथा तकनीकी क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना ली। आज दुनिया के लगभग हर बड़े देश में भारतीय समुदाय मौजूद है, लेकिन कुछ ऐसे देश हैं जहां भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।
संयुक्त राष्ट्र की माइग्रेशन रिपोर्ट और भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां से सबसे ज्यादा लोग विदेशों में जाकर बसते हैं। यही वजह है कि आज भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी अमेरिका से लेकर खाड़ी देशों, कनाडा, ब्रिटेन और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली हुई है। दिलचस्प बात यह है कि एक ऐसा देश भी है जहां कुल आबादी का करीब 36 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है। वहीं अमेरिका ऐसा देश है जहां भारत के बाहर सबसे ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं।
अमेरिका बना भारतीयों का सबसे बड़ा ठिकाना
भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी आबादी अमेरिका में रहती है। विदेश मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में करीब 54 लाख भारतीय मूल के लोग हैं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने अमेरिकी नागरिकता ले ली है, जबकि लाखों भारतीय एनआरआई के रूप में वहां काम कर रहे हैं। अमेरिका में भारतीयों की मौजूदगी सिर्फ संख्या तक सीमित नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, शिक्षा, शोध और कारोबार जैसे क्षेत्रों में भारतीयों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। कई बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष पदों पर भी भारतीय मूल के लोग काम कर रहे हैं।
UAE में हर तीन लोगों में एक भारतीय
संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई भारतीयों के लिए दूसरा सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यहां करीब 36 लाख भारतीय रहते हैं। सबसे खास बात यह है कि यूएई की कुल आबादी का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा भारतीयों का है। यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर, इंजीनियर, डॉक्टर, कारोबारी और श्रमिक काम करते हैं। दुबई और अबू धाबी जैसे शहर भारतीय समुदाय के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।
मलेशिया और कनाडा में भी बड़ी भारतीय आबादी
मलेशिया भारतीय मूल के लोगों के लिए तीसरा सबसे बड़ा घर माना जाता है। यहां करीब 30 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें से अधिकांश ने मलेशियाई नागरिकता ले रखी है। वहीं कनाडा में भी भारतीय समुदाय तेजी से बढ़ा है। यहां लगभग 30 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। खासकर पिछले कुछ वर्षों में पढ़ाई और नौकरी के लिए बड़ी संख्या में भारतीय युवा कनाडा पहुंचे हैं। यही वजह है कि भारतीय समुदाय वहां सबसे तेजी से बढ़ने वाले समूहों में शामिल हो गया है।
ब्रिटेन में भारतीयों की मजबूत पहचान
ब्रिटेन और भारत का ऐतिहासिक संबंध रहा है। आज यूनाइटेड किंगडम में करीब 19 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। यहां भारतीय समुदाय व्यापार, राजनीति, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भारतीय मूल के होने के कारण इस समुदाय की पहचान और मजबूत हुई है। भारतीय त्योहारों और संस्कृति का प्रभाव भी वहां साफ दिखाई देता है।
खाड़ी देशों में रोजगार का बड़ा केंद्र
सऊदी अरब भारतीयों के लिए रोजगार का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां करीब 25 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें अधिकांश लोग नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में वहां गए हैं। इसी तरह कुवैत में भी लगभग 10 लाख भारतीय रहते हैं। दोनों देशों में भारतीय समुदाय स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और बड़ी संख्या में लोग हर साल भारत पैसे भेजते हैं।
दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और म्यांमार में पुरानी जड़ें
दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों का इतिहास 100 साल से भी पुराना माना जाता है। यहां करीब 17 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। महात्मा गांधी ने भी अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय दक्षिण अफ्रीका में बिताया था। श्रीलंका में करीब 16 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। वहीं म्यांमार में भी लगभग 20 लाख भारतीय मूल के लोगों की मौजूदगी बताई जाती है। इन देशों में भारतीय समुदाय कई पीढ़ियों से रह रहा है और स्थानीय समाज का हिस्सा बन चुका है।
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दुनिया भर में बढ़ रहा भारतीयों का प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय समुदाय आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली प्रवासी समुदायों में से एक है। चाहे अमेरिका की टेक इंडस्ट्री हो, कनाडा की यूनिवर्सिटीज हों, ब्रिटेन की राजनीति हो या खाड़ी देशों का कारोबारी जगत, भारतीय हर जगह अपनी पहचान बना रहे हैं। भारतीय मूल के लोग न सिर्फ अपने परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत कर रहे हैं, बल्कि भारत और दुनिया के दूसरे देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह संख्या और प्रभाव दोनों बढ़ने की संभावना है।












