गाय ने दिया बच्चे को जन्म, देखा तो उड़ गए होश... 2 सिर और 8 पैर देख डॉक्टर भी रह गए हैरान

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के तेनाली मंडल में एक गाय ने ऐसे बछड़े को जन्म दिया है, जिसे देखकर स्थानीय लोग ही नहीं, पशु चिकित्सक भी हैरान रह गए। एरुकलापुडी स्थित आयुर्वेदिक आश्रम में जन्मे इस बछड़े के दो सिर और आठ पैर हैं। गाय का प्रसव सामान्य नहीं था और करीब 5 घंटे तक डॉक्टरों को मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार टीम ने गाय का सफल प्रसव कराया और बछड़े को बाहर निकाला। बछड़े की असामान्य शारीरिक बनावट की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों में इसकी चर्चा होने लगी। बड़ी संख्या में लोग आश्रम पहुंचने लगे और इस अनोखे बछड़े को देखने के लिए भीड़ जुट गई। आश्रम परिसर में कुछ समय के लिए लोगों की भीड़ बढ़ गई, जिसे बाद में नियंत्रित किया गया।
प्रसव के दौरान बिगड़ी स्थिति, डॉक्टरों को बुलाना पड़ा
जानकारी के मुताबिक, एरुकलापुडी स्थित आयुर्वेदिक आश्रम में एक गाय को प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। शुरुआत में जब स्थिति सामान्य नहीं दिखी तो आश्रम प्रबंधन ने पशुपालन विभाग को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे पशु चिकित्सकों ने जांच के बाद स्थिति को गंभीर माना और प्रसव कराने की प्रक्रिया शुरू की। बछड़े की स्थिति के कारण यह सामान्य डिलीवरी नहीं थी। डॉक्टरों की टीम को करीब पांच घंटे तक लगातार प्रयास करना पड़ा। लंबी प्रक्रिया के बाद जब बछड़ा बाहर आया तो उसकी शारीरिक बनावट देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। बछड़े के दो सिर और कुल आठ पैर दिखाई दिए।
बछड़े को देखने के लिए पहुंचने लगे लोग
अनोखे बछड़े के जन्म की खबर कुछ ही समय में एरुकलापुडी और आसपास के इलाकों में फैल गई। इसके बाद स्थानीय लोगों के साथ आसपास के कई गांवों से भी लोग आश्रम पहुंचने लगे। लोग बछड़े को करीब से देखने के लिए उत्सुक नजर आए। आश्रम में अचानक भीड़ बढ़ने से कुछ समय के लिए व्यवस्था प्रभावित हुई। बाद में लोगों को नियंत्रित किया गया। इस घटना के बाद बछड़ा पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। लोग इसे लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं, लेकिन पशु चिकित्सकों ने इसके पीछे किसी चमत्कार के बजाय वैज्ञानिक वजह बताई है।
डॉक्टरों ने बताई दो सिर और आठ पैर होने की वजह
पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों के मुताबिक, जानवरों में इस तरह की शारीरिक बनावट बेहद दुर्लभ जन्मजात असामान्यता के मामलों में देखी जा सकती है। इसे मेडिकल भाषा में Rare Congenital Anomaly कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भ में भ्रूण के विकास के दौरान अगर उसका विभाजन सामान्य तरीके से नहीं हो पाता या कोशिकाओं के विकास में किसी तरह की असामान्यता आ जाती है, तो शरीर के कुछ अंग असामान्य तरीके से विकसित हो सकते हैं। इसी तरह की दुर्लभ विकास संबंधी गड़बड़ी के कारण एक ही शरीर में दो सिर या अतिरिक्त पैर जैसे अंग दिखाई दे सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं।
पांच घंटे की मेहनत के बाद कराया गया प्रसव
इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती गाय का प्रसव कराना था। बछड़े की असामान्य बनावट के कारण सामान्य प्रसव संभव नहीं हो पा रहा था। डॉक्टरों की टीम ने करीब पांच घंटे तक प्रयास किया और इसके बाद बछड़े को बाहर निकाला गया। आश्रम में मौजूद लोगों के लिए भी यह अनुभव बेहद अलग था। डॉक्टरों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्हें प्रसव के दौरान असामान्य भ्रूण की स्थिति से निपटना पड़ा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बछड़े की आगे की स्वास्थ्य स्थिति और उसके जीवित रहने को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
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दुर्लभ मामला होने के कारण चर्चा में आया
दो सिर और आठ पैरों वाले बछड़े का जन्म सामान्य पशु जन्म की घटनाओं से बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि घटना के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा तेजी से फैल गई। पशु चिकित्सकों के अनुसार, इस तरह की जन्मजात असामान्यताएं भ्रूण के विकास के दौरान होने वाली जटिल प्रक्रियाओं से जुड़ी होती हैं। हर ऐसे मामले की प्रकृति अलग हो सकती है और वास्तविक कारण जानने के लिए विस्तृत पशु चिकित्सा जांच जरूरी होती है। फिलहाल एरुकलापुडी का यह अनोखा बछड़ा स्थानीय लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है, जबकि पशु चिकित्सकों के लिए यह एक दुर्लभ जन्मजात शारीरिक असामान्यता का मामला है।













