Tiger Shroff Firing Case: सूरत में हथियार छिपाए, ट्रेन में हुए सवार; मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में अहम सुराग

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आरोपियों की कथित साजिश से जुड़े नए पहलू सामने आ रहे हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों शूटर्स ने पुलिस से बचने और शहर से दूर निकलने की योजना बनाई थी। उनका शुरुआती लक्ष्य सूरत से दिल्ली पहुंचना और वहां से नेपाल की ओर निकलना बताया जा रहा है। हालांकि, आरोपियों की पहली योजना सफल नहीं हुई। दिल्ली जाने वाली बस छूटने के कारण उन्हें दूसरा रास्ता चुनना पड़ा। इसके बाद फोन कॉल के जरिए नए निर्देश दिए गए और ट्रेन से सफर करने का विकल्प अपनाया गया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम पहलू यह है कि जांचकर्ताओं ने आरोपियों की गतिविधियों को जोड़ने के लिए CCTV फुटेज और अन्य सुरागों की पड़ताल की। इससे फायरिंग के बाद उनकी आवाजाही की कड़ियों को समझने में मदद मिली।
क्या है टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस?
जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना हुई थी। इस वारदात में टाइगर श्रॉफ बाल-बाल बच गए, जबकि दो लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। घायलों में उनके ड्राइवर और उमेश चौहान नाम के एक फैन का जिक्र किया गया है। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग की ओर से लिए जाने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, किसी गैंग की जिम्मेदारी लेने का दावा और जांच में साबित हुए तथ्य अलग-अलग होते हैं। इसलिए मामले में आरोपियों की भूमिका और हमले के पीछे की साजिश को पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। फायरिंग के बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच तेज की। आरोपियों की पहचान, उनके संपर्कों और वारदात के बाद की गतिविधियों की पड़ताल इसी जांच का हिस्सा है।
प्लान A: सूरत से बस पकड़कर दिल्ली जाने की तैयारी
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार, तीनों शूटर्स का शुरुआती प्लान सूरत से दिल्ली जाने वाली बस पकड़ने का था। बताया जा रहा है कि दिल्ली पहुंचने के बाद उनका इरादा नेपाल की ओर जाने का था। इस योजना के तहत आरोपियों को पहले सूरत से बाहर निकलना था और फिर आगे का सफर तय करना था। लेकिन उनकी रणनीति उस समय बिगड़ गई, जब वे बस स्टैंड पहुंचे और दिल्ली जाने वाली बस निकल चुकी थी। बस छूटने के बाद उनके सामने आगे की यात्रा के लिए दूसरा विकल्प चुनने की चुनौती थी। इसी वजह से उनकी फरारी की योजना में बदलाव करना पड़ा।
प्लान B: VoIP कॉल के जरिए मिले नए निर्देश
पहली योजना विफल होने के बाद मास्टरमाइंड अनिल पंडित ने प्लान B सक्रिय किया। जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, आरोपी अंकित खटक के जरिए तीनों शूटर्स को VoIP कॉल पर नए निर्देश भेजे गए। VoIP यानी Voice over Internet Protocol ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से इंटरनेट के जरिए वॉइस कॉल की जा सकती है। इस मामले में कॉल के जरिए निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन कॉल्स की पूरी सामग्री और आरोपियों के बीच हुई बातचीत के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के आधिकारिक विवरण पर निर्भर करेंगे। नए निर्देशों के बाद तीनों कथित शूटर्स ने सड़क मार्ग से आगे बढ़ने के बजाय ट्रेन से यात्रा करने का फैसला किया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह बदलाव उनके पहले से बनाए गए प्लान में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे तीनों शूटर्स
जांच के मुताबिक, फूल सिंह, रेहान अंसारी और ऋतिक कुमार नाम के तीनों शूटर्स ऑटो-रिक्शा से सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे। बताया गया है कि वे सुबह करीब 1:33 बजे पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हुए। ट्रेन में चढ़ने से पहले आरोपियों ने फायरिंग में इस्तेमाल किए गए दो हथियार और गोलियां सूरत बस स्टैंड के पास एक खुली जगह में छिपा दी थीं। जांच में इसके पीछे ट्रेन यात्रा के दौरान पुलिस चेकिंग का डर होने की बात सामने आई है।
जयपुर पहुंचने से पहले ट्रेन से उतरने का प्लान
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार, तीनों शूटर्स को जयपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन तक पहुंचने से पहले ट्रेन से उतरने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद उनका इरादा बस या टैक्सी की मदद से सड़क मार्ग से दिल्ली की तरफ बढ़ने और फिर नेपाल जाने का था। यह रणनीति पहले बनाए गए रास्ते से अलग थी। बस छूटने के बाद ट्रेन से यात्रा और फिर बीच रास्ते में उतरकर सड़क मार्ग अपनाने की योजना उनके फरार होने के प्रयास का हिस्सा बताई गई है।
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CCTV फुटेज से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर
इस मामले की जांच में CCTV फुटेज की भूमिका अहम बताई जा रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के कैमरों से मिले फुटेज की मदद से शूटर्स की गतिविधियों को ट्रैक किया। CCTV फुटेज जांच में कई तरह से मदद कर सकता है। इससे किसी व्यक्ति की आवाजाही के समय, इस्तेमाल किए गए परिवहन के साधन और घटनाओं के क्रम को समझने में सहायता मिलती है।



















