ड्रग माफियाओं पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन! 3 राज्यों में 38 ठिकानों पर छापे, 18 गिरफ्तार, 1424 बैंक खाते फ्रीज

देश में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत चलाए गए ऑपरेशन ट्राइडेंट (Operation Trident) में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद इस कार्रवाई की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन और संपत्तियों का भी पता चला है।
23 अक्टूबर को तीन राज्यों में एक साथ 38 जगह छापेमारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बताया कि 23 अक्टूबर को सुरक्षा एजेंसियों ने असम, मिजोरम और मणिपुर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। तीनों राज्यों में कुल 38 जगहों पर एक साथ छापे मारे गए। शाह के मुताबिक, इस कार्रवाई में एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह को बड़ा झटका लगा है। यह नेटवर्क लंबे समय से सीमावर्ती इलाकों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था। इस ऑपरेशन में केंद्रीय एजेंसियों के साथ तीनों राज्यों की पुलिस ने भी अहम भूमिका निभाई।
100 करोड़ के हवाला लेनदेन का खुलासा
ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान जांच एजेंसियों को कई बड़े सुराग मिले। अमित शाह के मुताबिक, कार्रवाई में करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला है। इसके अलावा जांच एजेंसियों ने 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया है। इन खातों के जरिए होने वाले संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है। इस कार्रवाई से साफ है कि ड्रग तस्करी का यह मामला सिर्फ नशीले पदार्थों की सप्लाई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़े स्तर पर पैसों का लेनदेन भी चल रहा था।
500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद
इस बड़े ऑपरेशन में सुरक्षा एजेंसियों ने 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं। साथ ही ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डेटोनेटर की बरामदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, इसे लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों और उनके संपर्कों के जरिए पूरे नेटवर्क से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं।
क्या है 'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर'?
अमित शाह ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क 'डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर' के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। उनके मुताबिक, यह रास्ता भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों से जुड़ा है। इसी रास्ते का इस्तेमाल कर तस्कर नशीले पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते थे। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण इस क्षेत्र में तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में ऑपरेशन ट्राइडेंट को सीमा पार ड्रग तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
31 दिसंबर 2029 तक ड्रग नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार देश को नशा मुक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक नशीले पदार्थों के हर नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने साफ कहा कि ड्रग तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार तब तक ऐसे नेटवर्क पर प्रहार करती रहेगी, जब तक उनका पूरी तरह खात्मा नहीं हो जाता। ऑपरेशन ट्राइडेंट इसी अभियान का एक बड़ा हिस्सा है। इसके जरिए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों को सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस को दी बधाई
ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता पर अमित शाह ने केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा एजेंसियों का आपसी तालमेल बेहद जरूरी है। इस कार्रवाई में केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टीमों ने मिलकर काम किया। फिलहाल ऑपरेशन ट्राइडेंट में हुई गिरफ्तारियों, बैंक खातों पर कार्रवाई और करोड़ों रुपये के लेनदेन के खुलासे को ड्रग तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में भी ऐसे नेटवर्क के खिलाफ अभियान जारी रहेगा, ताकि देश में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाई जा सके।




















