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MP News :घर-घर पानी पहुंचाने का काम सुस्त, रीवा, जबलपुर, शहडोल फिसड्डी

अमृत 2.0 योजना में प्रदेश के 78 शहरों में पानी और सीवेज नेटवर्क का काम 2025 तक पूरा होना था लेकिन अभी तक सिर्फ 55% ही हुआ है।  नगरीय निकाय के पहले तक ज्यादातर शहरों में काम पूरा होने की संभावना भी कम है।
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घर-घर पानी पहुंचाने का काम सुस्त, रीवा, जबलपुर, शहडोल फिसड्डी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। शहरों में हर घर तक पाइप लाइन से पानी सप्लाई और नलजल के उचित उपाय के लिए ढाई वर्ष पहले सभी निकायों को पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई गई थी। अक्टूबर 2023 में काम के आदेश हुए। 2025 तक काम पूरा करना था। हालांकि कमजोर तैयारी और उदासीनता के चलते यह काम निकाय चुनाव से पहले भी पूरा होना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि अभी तक औसतन 55 प्रतिशत काम ही हो पाया है।

    कहीं जमीन नहीं मिल रही तो कहीं DPR फाइनल नहीं

    प्रदेश के 78 शहरों में अमृत 2.0 मिशन के तहत पानी और सीवेज नेटवर्क तैयार करने पर काम हो रहा है। इसके लिए निकायों को करीब 13 हजार करोड़ रुपए का बजट दिया गया है। रीवा, जबलपुर और शहडोल संभाग में कामों की स्थिति काफी खराब है। इन तीनों संभागों में इस मिशन में 32 शहरों को शामिल किया गया है, लेकिन कहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लान बनाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है, तो कहीं अभी तक DPR ही फाइनल नहीं हो पाई है। वहीं कई जगह परियोजना को रिवाइज किया जाना है। शहडोल में आठ परियोजनाओं में भूमि का इश्यू आ रहा है। कई निकाय लोक निर्माण, पीएचई सहित अन्य विभागों से दो साल तक अनापत्ति नहीं ले पाए।

    आठ निकायों में स्थिति ज्यादा खराब

    औद्योगिक हब पीथमपुर, टीकमगढ़, धार सहित प्रदेश के आठ जिलों में स्थिति बेहद खराब है। इन जिलों में तीन प्रतिशत भी काम नहीं हुआ है। इसको लेकर निकायों के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।  

    22 शहरों में 30 प्रतिशत काम

    ग्वालियर, दमोह, अशोक  नगर सहित 22 शहरों में तीन वर्ष के अंदर सिर्फ 30 फीसदी काम हो पाया है। इन शहरों में काम कर रहे ठेकेदार, ड्राइंग डिजाइन तैयार करने वाली कंपनियों और कंसल्टेंटों को समय पर काम पूरा करने के लिए कहा गया है। वहीं कई ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया है। कई सीएमओ से यह लिखकर देने को कहा गया है कि वे समय पर काम करा लेंगे।

    गंजबासौदा के उदाहरण से समझें

    गंजबासौदा की आंबेडर कॉलोनी में सीवेज लाइन खोदी गई। तीन माह से यह लाइन खुदी है, लेकिन न तो पाइप लाइन डाली गई और न ही पाइप लाइन के लिए खोदे गए गड्ढों को भरा गया। ठेकेदार तीन माह पहले काम छोड़कर जा चुका है।

    अब ACS मैदान में उतरे

    अपर मुख्य सचिव संजय दुबे समीक्षा और कार्यों की प्रगति की मॉनिटरिंग के बाद अब मैदान में उतर गए हैं। वह 6 फरवरी से सागर संभाग से शुरुआत करेंगे। इसके बाद जबलपुर, सतना, रीवा और शहडोल संभाग के निकायों में जाकर काम की समीक्षा करेंगे। इस दौरान वे यह पड़ताल कर रहे हैं कि अधिकारियों ने जो रिपोर्ट बताई है, वह कितना सही है। हिदायत के बाद निकायों ने कितना अमल किया। 

    खराब परफॉर्मेंस वालों का सस्पेंशन और जुर्माने की कार्रवाई

    पुअर परफॉर्मेंस वालों के विरुद्ध सस्पेंशन, जुर्माना एवं ब्लैक लिस्ट करने जैसी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही भी तय की जा रही है। त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाओं में विलंब हो रहा है। डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोषी मिलने पर उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।

    संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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