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अशोक गौतम, भोपाल। शहरों में हर घर तक पाइप लाइन से पानी सप्लाई और नलजल के उचित उपाय के लिए ढाई वर्ष पहले सभी निकायों को पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई गई थी। अक्टूबर 2023 में काम के आदेश हुए। 2025 तक काम पूरा करना था। हालांकि कमजोर तैयारी और उदासीनता के चलते यह काम निकाय चुनाव से पहले भी पूरा होना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि अभी तक औसतन 55 प्रतिशत काम ही हो पाया है।
प्रदेश के 78 शहरों में अमृत 2.0 मिशन के तहत पानी और सीवेज नेटवर्क तैयार करने पर काम हो रहा है। इसके लिए निकायों को करीब 13 हजार करोड़ रुपए का बजट दिया गया है। रीवा, जबलपुर और शहडोल संभाग में कामों की स्थिति काफी खराब है। इन तीनों संभागों में इस मिशन में 32 शहरों को शामिल किया गया है, लेकिन कहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लान बनाने के लिए जमीन नहीं मिल रही है, तो कहीं अभी तक DPR ही फाइनल नहीं हो पाई है। वहीं कई जगह परियोजना को रिवाइज किया जाना है। शहडोल में आठ परियोजनाओं में भूमि का इश्यू आ रहा है। कई निकाय लोक निर्माण, पीएचई सहित अन्य विभागों से दो साल तक अनापत्ति नहीं ले पाए।
औद्योगिक हब पीथमपुर, टीकमगढ़, धार सहित प्रदेश के आठ जिलों में स्थिति बेहद खराब है। इन जिलों में तीन प्रतिशत भी काम नहीं हुआ है। इसको लेकर निकायों के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है।
ग्वालियर, दमोह, अशोक नगर सहित 22 शहरों में तीन वर्ष के अंदर सिर्फ 30 फीसदी काम हो पाया है। इन शहरों में काम कर रहे ठेकेदार, ड्राइंग डिजाइन तैयार करने वाली कंपनियों और कंसल्टेंटों को समय पर काम पूरा करने के लिए कहा गया है। वहीं कई ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया है। कई सीएमओ से यह लिखकर देने को कहा गया है कि वे समय पर काम करा लेंगे।
गंजबासौदा की आंबेडर कॉलोनी में सीवेज लाइन खोदी गई। तीन माह से यह लाइन खुदी है, लेकिन न तो पाइप लाइन डाली गई और न ही पाइप लाइन के लिए खोदे गए गड्ढों को भरा गया। ठेकेदार तीन माह पहले काम छोड़कर जा चुका है।
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे समीक्षा और कार्यों की प्रगति की मॉनिटरिंग के बाद अब मैदान में उतर गए हैं। वह 6 फरवरी से सागर संभाग से शुरुआत करेंगे। इसके बाद जबलपुर, सतना, रीवा और शहडोल संभाग के निकायों में जाकर काम की समीक्षा करेंगे। इस दौरान वे यह पड़ताल कर रहे हैं कि अधिकारियों ने जो रिपोर्ट बताई है, वह कितना सही है। हिदायत के बाद निकायों ने कितना अमल किया।
पुअर परफॉर्मेंस वालों के विरुद्ध सस्पेंशन, जुर्माना एवं ब्लैक लिस्ट करने जैसी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए है। ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही भी तय की जा रही है। त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाओं में विलंब हो रहा है। डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोषी मिलने पर उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।
संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग