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प्रदेश के 250 से अधिक नगरीय निकायों में कर्मचारियों के वेतन का संकट गहराया

चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि घटाकर 300 करोड़ कर दी, जबकि निकाय बढ़कर 418 हो गए
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प्रदेश के 250 से अधिक नगरीय निकायों में कर्मचारियों के वेतन का संकट गहराया

अशोक गौतम-भोपाल। नगर पालिका राजगढ़ में पदस्थ कर्मचारी अशोक मेवाड़ा का कहना है कि उन्हें कई महीनों से वेतन लेट- लतीफ मिल रहा है। इससे हमें अपना घर चलाना मुश्किल हो रहा है। अगस्त माह में और देरी से वेतन मिलने की संभावना है। ये हाल अकेले अशोक का नहीं है बल्कि प्रदेश के 250 से ज्यादा नगरीय निकायों के कर्मचारियों का है। राज्य में कुल 418 निकाय हैं।

वेतन संकट बने रहने का मुख्य कारण निकायों की बढ़ती संख्या, उन्हें मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति राशि में कटौती और मुद्रण शुल्क में कमी के साथ निकायों में खर्च ज्यादा और वसूली कम होना है। इससे कर्मचारियों को 6-6 महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। घाटे से उबरने के लिए निकाय अध्यक्षों ने सरकार से विशेष पैकेज और चुंगी क्षतिपूर्ति के साथ स्टांप ड्यूटी राशि बढ़ाने की मांग की है।

स्टांप ड्यूटी में एक प्रतिशत की कटौती

वर्ष 2019 तक निकायों के सीमा क्षेत्र में जो निजी संपत्ति खरीदी और बेची जाती थी, उसमें लगने वाले स्टांप ड्यूटी का दो प्रतिशत निकायों को मिलता था। वर्ष 2020 में सरकार ने यह ड्यूटी घटाकर एक प्रतिशत कर दी। इससे निकायों को स्टांप ड्यूटी से आय आधी हो गई।

4 साल पहले घट गए 24 करोड़ रुपए

मप्र में चुंगी क्षतिपूर्ति का निर्धारण वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सरकार प्रतिवर्ष करती है। प्रदेश में 378 नगरीय निकायों को वर्ष 2019 तक 324 करोड़ रुपए आवंटित होते थे। वर्ष 2020 में घटाकर 300 करोड़ रुपए कर दिए गए। सरकार ने व्यवस्था की थी कि प्रति वर्ष चुंगी क्षतिपूर्ति की दस फीसदी राशि बढ़ाई जाएगी। पिछले 14 वर्षों में निकायों की संख्या 418 हो गई है, फिर भी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं बढ़ी। यांत्रिकी प्रकोष्ठ के नाम पर भी 60 करोड़ की कटौती हो गई।

तहबाजारी बंद करने से कमाई पर पड़ा असर

निकायों की एक बड़ी कमाई का जरिया तहबाजारी था। सरकार ने विधानसभा चुनाव से तीन माह पहले तहबाजारी बंद कर दी। बाद में यह भी निर्णय लिया गया कि तहबाजारी साल में एक बार ली जाएगी। आदेश जारी नहीं होने से कारोबारी अब न तो हर दिन तहबाजारी दे रहे हैं और न ही साल में एक बार दे रहे हैं। इससे भोपाल, इंदौर निकाय को साल भर में 50 से 60 करोड़ हर साल और छोटे निकायों को दो से 30 करोड़ रुपए तक मिलते थे।

राशि कटोत्रा से वेतन की गणित गड़बड़ाई

हमारे यहां पिछले तीन माह से कर्मचारियों को वेतन लेट मिल रहा है। इसकी मुख्य वजह है कि सरकार ने पिछले वर्ष एक करोड़ 65 लाख रुपए कटोत्रा कर लिया था। इससे कर्मचारियों को देरी से वेतन मिल रहा है। इस बात की जानकारी सरकार को भी दी गई है। -रईस खान, सीएमओ, नपा ब्यावरा

स्टांप ड्यूटी सहित अन्य मदों का भी पैसा नहीं मिला

राजगढ़, आगर सहित करीब ढाई सौ निकायों में कर्मचारियों के वेतन तीन से 6 माह तक लेट मिल रहा है। निकायों को स्टांप ड्यूटी सहित अन्य उनके हक का भी पैसा नहीं मिला रहा है। नई नगर पंचायतों के बनने आर्थिक भार बढ़ रहा है, वहीं कंपनसेशन की राशि कम हो रही है। -सुरेन्द्र सोलंकी, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश नगर निगम, नगर पालिका कर्मचारी संघ

निकायों को बचाने सरकार उपलब्ध कराए राशि

प्रदेश के विभिन्न नगर परिषद और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति लगातार खराब हो रही है। ऐसे में सैकड़ों कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ रहे हैं। चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि भी पर्याप्त नहीं मिल रही है। निकायों को बंद होने से बचाने के लिए राज्य सरकार से विशेष पैकेज देने की लगातार मांग की जा रही है। -विनोद मालवीय, नगर पालिका अध्यक्ष परासिया जिला छिंदवाड़ा

People's Reporter
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