Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

कदंब की खूशबू ऐसी फैली कि ग्रामीणों ने गांव का नाम कांटी से बदल कदमकांटी रख लिया, हर साल हजारों महिलाएं करती हैं पूजा

छतरपुर जिले के ग्राम कांटी की कहानी
Follow on Google News
कदंब की खूशबू ऐसी फैली कि ग्रामीणों ने गांव का नाम कांटी से बदल कदमकांटी रख लिया, हर साल हजारों महिलाएं करती हैं पूजा

पुष्पेंद्र सिंह, भोपाल। वैसे तो हर गांव, शहर की एक अलग पहचान होती है। लेकिन छतरपुर जिले की जनपद पंचायत बिजावर के ग्राम कांटी की पहचान उसके विशाल और अनूठे कदंब के पेड़ से है। इसकी पत्तियों की खूशबू इस कदर फैली कि करीब 2 हजार की आबादी वाला यह छोटा सा गांव आज मप्र ही नहीं, कई अन्य राज्यों में भी प्रसिद्ध है। इसी वजह से दशकों पहले लोगों ने गांव का नाम कांटी से बदलकर कदमकांटी रख लिया। कार्तिक मास में पंचमी के दिन आसपास के कई जिलों के साथ राजस्थान और उत्तरप्रदेश से 50 हजार से अधिक महिलाएं यहां एकत्र होती हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस पेड़ की उम्र हजारों साल है। गांव के मजबूत सिंह बताते हैं कि हमने ऐसा अद्भुत कदंब का वृक्ष 55 साल की उम्र में कहीं और नहीं देखा।

कदम का बीज कहीं और नहीं लगता

सहकारी नेता हरिओम अग्निहोत्री का दावा है कि यह पेड़ कम से कम 10 हजार वर्ष पुराना है। मथुरा- वृंदावन में सबसे अधिक उम्र के 15 कदंब के वृक्ष थे, जो अब नहीं हैं। कदमकांटी में मौजूद वृक्ष का बीज कहीं और नहीं लगता है। कई बार प्रयास किया गया, लेकिन इसका बीज अन्यत्र नहीं उगा। उनका कहना है कि इस वृक्ष की उम्र पता करने के लिए शोध किया जाना चाहिए।

कदमकांटी के इस वृक्ष के बारे में हमने विभागीय तौर पर जानकारी ली है। बताया गया है कि इसकी उम्र के बारे में कुछ ज्ञात नहीं है। पहला प्रयास होगा कि इसके बीज से पौधा बनाया जाए। - संजीव झा, वन संरक्षक, छतरपुर वृत्त

कदम के पत्ते में सामान्यत: खुशबू नहीं होती है। किसी पेड़ की उम्र विभाग गोलाई और मोटाई के आधार पर पता करता है। कदमकांटी के वृक्ष पर जल्द ही शोध कराएंगे। - यूके सुबुद्धि, एपीसीसीएफ, विकास

People's Reporter
By People's Reporter

Latest Posts