Telegram ban case :सरकार बोली-आतंकी गतिविधियों का अड्डा बन गया है प्लेटफॉर्म, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली। NEET-UG परीक्षा से पहले टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला केवल एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल अधिकारों और सरकारी शक्तियों के दायरे से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
पेपर लीक के बाद बढ़ी सरकार की चिंता
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने सरकार और परीक्षार्थियों दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने परीक्षा से पहले संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई।
अदालत ने मांगे सभी पक्षों के लिखित जवाब
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, टेलीग्राम और अन्य संबंधित पक्षों को अपने लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि मामले के सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा। इस मामले को भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म नियमन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में भी देखा जा सकता है।
केंद्र सरकार ने छात्रों का हित बताया सर्वोपरि
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि करोड़ों छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने दलील दी कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं होती हैं तो उसका असर पूरे देश के छात्रों पर पड़ता है। ऐसे मामलों में सरकार को समय रहते कदम उठाने का अधिकार है।
‘NEET Mafia’ चैनल का उल्लेख
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर संचालित कथित ‘NEET Mafia’ नामक चैनल का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार इस चैनल से हजारों लोग जुड़े हुए हैं और ऐसे प्लेटफॉर्म संवेदनशील तथा संभावित रूप से अवैध सामग्री के प्रसार का माध्यम बन सकते हैं। केंद्र ने तर्क दिया कि यही कारण है कि प्लेटफॉर्म की निगरानी और जवाबदेही का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
टेलीग्राम पर निगरानी में विफलता का आरोप
सरकार ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम के साथ पहले भी कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। अधिकारियों ने कंपनी को अवैध सामग्री के प्रसार पर नियंत्रण के लिए कई सुझाव दिए थे। सरकार का आरोप है कि वर्षों से तकनीकी सीमाओं का हवाला दिया जाता रहा, लेकिन प्रभावी समाधान सामने नहीं आया। सरकार ने यह भी कहा कि तकनीकी उपायों को लेकर कंपनी का सहयोग अपेक्षित स्तर का नहीं रहा।
टेलीग्राम ने प्रतिबंध को बताया असंगत
टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने सरकार के कदम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी चैनल या सामग्री में समस्या है तो उसे हटाया जा सकता है, लेकिन पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना उचित नहीं है। कंपनी का तर्क था कि लाखों लोग टेलीग्राम का उपयोग शिक्षा, व्यवसाय और संचार जैसे वैध उद्देश्यों के लिए करते हैं, इसलिए व्यापक प्रतिबंध अनुपातिक नहीं माना जा सकता।
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हाईकोर्ट ने पूछे अहम कानूनी सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उसके सामने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि किसी सीमित समस्या से निपटने के लिए क्या पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। कोर्ट ने माना कि कानून सरकार को कुछ परिस्थितियों में ऐसी शक्ति देता है, लेकिन उसका प्रयोग तथ्यों और परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने यह भी रिकॉर्ड पर लिया कि टेलीग्राम के अनुसार यह कोई आपातकालीन स्थिति नहीं थी।












