MP School Teacher Transfer 2026:19 जून से शुरू होंगे शिक्षकों के तबादले, 90% ई-अटेंडेंस अनिवार्य, तभी मिलेगा ट्रांसफर

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूल शिक्षकों के तबादलों को लेकर 2026 में नई व्यवस्था लागू की है। इस नीति के तहत कई सख्त नियम बनाए गए हैं, जिनका सीधा असर हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा। ट्रांसफर प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और इसमें ई-अटेंडेंस, सेवा अवधि और अन्य शर्तों को आधार बनाया गया है। नीचे पूरी जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
19 जून 2026 से शुरू होंगे स्वैच्छिक ट्रांसफर
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में शिक्षकों के स्वैच्छिक (Voluntary) ट्रांसफर 19 जून 2026 से शुरू किए जाएंगे। इसके लिए एक ऑनलाइन प्रक्रिया तय की गई है। शिक्षक अपने ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की अंतिम तारीख 23 जून 2026 रखी गई है। इसके बाद किसी भी प्रकार के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। समय सीमा के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी। इसका मतलब है कि जो शिक्षक तबादला चाहते हैं, उन्हें तय समय के अंदर ही आवेदन करना होगा।
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90% ई-अटेंडेंस जरूरी, नहीं तो ट्रांसफर नहीं
नई ट्रांसफर नीति में सबसे अहम नियम ई-अटेंडेंस से जुड़ा है। जिन शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 90% या उससे अधिक है, वही ट्रांसफर के लिए पात्र होंगे। 90% से कम उपस्थिति वाले शिक्षकों को इस बार ट्रांसफर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। यह नियम इस बार सख्ती से लागू किया जाएगा।
58 हजार शिक्षकों के ट्रांसफर पर फिलहाल रोक
राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए करीब 58,000 शिक्षकों के ट्रांसफर को होल्ड (रोक) दिया है। इन शिक्षकों के तबादले अभी नहीं होंगे। लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के निर्देश के अनुसार यह रोक लगी है। यानि फरवरी 2027 तक इनके ट्रांसफर पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसके बाद नई नीति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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शिक्षा पोर्टल पर सभी शिक्षकों का डेटा होगा अपडेट
नई ट्रांसफर नीति को लागू करने के लिए सभी शिक्षकों का डेटा डिजिटल रूप में अपडेट किया जा रहा है। सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर दर्ज की जाएगी। हर स्कूल से एक-एक शिक्षक का पूरा विवरण अपलोड किया जाएगा। जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना या अन्य कार्यों में लगी है, उनका भी रिकॉर्ड दर्ज होगा।
3 साल सेवा अवधि पूरी करना जरूरी
नई व्यवस्था में एक और महत्वपूर्ण नियम जोड़ा गया है। जिन शिक्षकों की संविलियन (merger) के बाद सेवा अवधि 3 साल पूरी नहीं हुई है। उन्हें भी इस ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। केवल योग्य और तय शर्तें पूरी करने वाले शिक्षक ही आवेदन कर पाएंगे। इस नियम का उद्देश्य स्थिरता बनाए रखना और बार-बार ट्रांसफर को रोकना है।
अप्रैल तक की उपस्थिति को माना जाएगा आधार
सरकार ने यह भी साफ किया है कि ट्रांसफर के लिए पूरे साल का डेटा नहीं देखा जाएगा।मई और जून के पहले सप्ताह में गर्मी की छुट्टियां होती हैं इसलिए ट्रांसफर के लिए केवल अप्रैल 2026 तक की उपस्थिति को आधार माना जाएगा। इसी डेटा के आधार पर पात्रता तय की जाएगी।
जिला और संकुल स्तर पर निगरानी
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों और संकुल (cluster) स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी शिक्षकों का रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट किया जाए, जिनकी ई-अटेंडेंस कम है, उनकी सूची अलग बनाई जाए, डेटा में किसी भी प्रकार की गलती न हो और पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए।
ट्रांसफर पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य
नई ट्रांसफर नीति के पीछे सरकार के कुछ मुख्य उद्देश्य हैं-
- स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना
- पारदर्शी और डिजिटल सिस्टम लागू करना
- लंबे समय से एक ही जगह पर जमे शिक्षकों का सही प्रबंधन
- जरूरत के अनुसार स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण
- शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत और व्यवस्थित हो।
शिक्षकों के लिए क्या जरूरी है?
इस नई नीति के तहत शिक्षकों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जो शिक्षक इन शर्तों को पूरा करेंगे, उन्हें ही ट्रांसफर का लाभ मिलेगा।
- ई-अटेंडेंस नियमित और 90% से अधिक रखें
- समय पर ऑनलाइन आवेदन करें
- अपने सभी दस्तावेज और जानकारी अपडेट रखें
- शिक्षा पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल सही रखें











