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आंखों में आंसू, दिल में उम्मीद… 15 साल बाद गूंजी किलकारी, डॉक्टरों ने लिखी मां-बेटे की नई कहानी

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आंखों में आंसू, दिल में उम्मीद… 15 साल बाद गूंजी किलकारी, डॉक्टरों ने लिखी मां-बेटे की नई कहानी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    गुना जिला अस्पताल में एक महिला को 15 साल बाद मातृत्व का सुख मिला। डॉक्टर सतीश राजपूत और उनकी टीम ने उच्च जोखिम वाले केस में सफल ऑपरेशन कर महिला और नवजात दोनों की जान बचाई।

    15 साल से संतान सुख से वंचित थी रचना

    ग्राम बागेरी, तहसील बमोरी निवासी रचना की शादी को 15 साल हो चुके थे। कई बार गर्भवती होने के बावजूद उन्हें संतान सुख नहीं मिल पाया। पहली बार प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के दौरान बच्चा गर्भ में ही मृत पाया गया। दूसरी और तीसरी बार भी आपरेशन हुआ, लेकिन बच्चा जीवित नहीं रह सका। तीसरे प्रयास में रचना की जान तो बच गई, लेकिन परिवार मायूस रह गया। लगातार असफलताओं और समाज की आलोचनाओं से परिवार निराशा में डूब गया था।

    डॉक्टर सतीश राजपूत ने संभाली जिम्मेदारी

    चौथी बार गर्भवती होने पर रचना के पति गोपाल ने जिला अस्पताल गुना के डॉक्टर सतीश राजपूत से संपर्क किया। डॉक्टर ने पूरे गर्भकाल में परिवार को हिम्मत दी और सही मार्गदर्शन किया।

    टीम वर्क से हुआ सफल आपरेशन

    सिविल सर्जन डॉ. वीरेन्द्र सिंह रघुवंशी के मार्गदर्शन में, एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. रूचि राणा, स्टाफ अलका गोविंद और वार्ड बॉय धरमवीर की मदद से रचना का आपातकालीन ऑपरेशन किया गया।

     रात 10 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ। गोपाल की आंखों में डर और चिंता थी, लेकिन डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया। आखिरकार ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और रचना ने स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया।

    परिवार ने जताया आभार

    रचना और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। परिवार ने डॉक्टर सतीश राजपूत और पूरी टीम का आभार जताया, जिन्होंने कठिन समय में उन्हें हिम्मत दी और 15 साल बाद खुशियां लौटाईं।

    People's Reporter
    By People's Reporter

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