'मर्यादा भंग', 'पवित्रता खो दी'…जैसे शब्दों का नही होगा इस्तेमाल, जजों के लिए सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन
समिति का मानना है कि ऐसी भाषा पुरानी सोच को बढ़ावा देती है और पीड़ित को दोबारा मानसिक आघात पहुंचा सकती है। ऐसे में किसी महिला के कपड़ों या व्यवहार के आधार पर उसके चरित्र का आकलन करना पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य है।
Dolly Wasvani
4 Aug 2026



























