PU Special :लाइक्स और व्यूज की चाह में जानलेवा कदम उठा रहे युवा, मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे जोखिम भरे व्यवहार के मामले

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। 18 साल के उमेश (परिवर्तित नाम) ने सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने के लिए दोस्तों के साथ पहली मंजिल से छलांग लगाने की योजना बनाई और कोशिश के दौरान चोट भी लगी। वहीं 21 वर्षीय पलक शर्मा बाइक से स्टंट करते समय हादसे का शिकार हो गईं, वह इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना चाहती थीं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मिलने वाली ऑनलाइन प्रतिक्रिया दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को सक्रिय करती है, जिससे बार-बार लाइक्स और व्यूज पाने की चाह बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया का इस्तेमाल नियंत्रण से बाहर होकर नींद, पढ़ाई, काम और रिश्तों को प्रभावित करने लगे तो समय पर काउंसलिंग और विशेषज्ञ की मदद जरूरी है।
पहली मंजिल से छलांग लगाने की बनाई योजना
18 साल के उमेश (परिवर्तित नाम) को सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने का ऐसा जुनून हुआ कि उसने दोस्तों के साथ पहली मंजिल से छलांग लगाने की योजना बना ली। एक बार कोशिश के दौरान उसे चोट भी लगी, लेकिन वीडियो या स्टंट को अपेक्षित लाइक्स नहीं मिले तो वह दोबारा कोशिश की तैयारी करने लगा। बेटे के इस व्यवहार से परेशान परिजन उसे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उसे मनोचिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी।
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बाइक स्टंट के दौरान पैर में गंभीर चोट
21 वर्षीय पलक शर्मा हाल ही में बाइक से स्टंट करते समय हादसे का शिकार हो गईं। दुर्घटना में उनके पैर में गंभीर चोट आई। इलाज के दौरान उन्होंने डॉक्टर को बताया कि वह बाइक से स्टंट कर रही थीं और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालना चाहती थीं, इसी दौरान हादसा हो गया। डॉक्टर ने पलक के परिजन को भी मनोचिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी।
हर सप्ताह पहुंच रहे ऐसे दो-तीन मामले
ये दो मामले तो सिर्फ बानगी हैं। मनोचिकित्सकों के पास हर सप्ताह ऐसे दो या तीन मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें युवा सोशल मीडिया पर पहचान और प्रतिक्रिया पाने के लिए सामान्य सीमाओं से आगे जाकर खतरनाक स्टंट या जोखिम भरा व्यवहार कर रहे हैं। जेपी अस्पताल स्थित मनकक्ष में भी हर सप्ताह ऐसे मामले आते हैं, जहां युवाओं की काउंसलिंग कर उन्हें समझाया जाता है और बहुत कम मामलों में मेडिकेशन की जरूरत होती है।
लाइक्स का रिवार्ड सिस्टम बना रहा जोखिम लेने की आदत
मनोचिकित्सक डॉ. मोनिका वर्मा के अनुसार सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा और नियंत्रण से बाहर इस्तेमाल प्रॉब्लमेटिक सोशल मीडिया यूज कहलाता है। लाइक्स और कमेंट मिलने पर दिमाग के रिवार्ड सिस्टम में डोपामिन से जुड़ी गतिविधि बढ़ती है, जिससे व्यक्ति बार-बार उसी प्रतिक्रिया को पाने की कोशिश कर सकता है। धीरे-धीरे ज्यादा व्यूज और लाइक्स के लिए जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है और सोशल मीडिया का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई, नींद और रिश्तों को प्रभावित करने लगे तो विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।
लाइक्स के पीछे भागने से शरीर और दिमाग दोनों पर असर
लाइक्स और व्यूज के लिए जोखिम लेने से सड़क हादसे, गिरने, गंभीर चोट और जान जाने तक का खतरा रहता है। लंबे समय तक सोशल मीडिया पर निर्भरता से नींद में कमी, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, पढ़ाई या काम में ध्यान कम लगना और परिवार से दूरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। लगातार ऑनलाइन प्रतिक्रिया पर निर्भर रहने से वास्तविक जीवन में मिलने वाली सामान्य संतुष्टि भी कम महसूस हो सकती है।
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कैसे पहचानें सोशल मीडिया की बढ़ती लत
हर समय लाइक्स और व्यूज की चिंता करना, पोस्ट के बाद बार-बार प्रतिक्रिया देखना और कम लाइक्स मिलने पर बेचैनी या चिड़चिड़ापन होना इसके संकेत हो सकते हैं। वीडियो बनाने के लिए खतरनाक स्टंट करना, सोशल मीडिया के कारण पढ़ाई, काम या नींद प्रभावित होना और परिवार-दोस्तों से दूरी बढ़ना भी चेतावनी के संकेत हैं। बार-बार जोखिम लेने के बावजूद व्यवहार को रोक न पाना भी ऐसी स्थिति की ओर इशारा कर सकता है। इसी को लेकर जेपी अस्पताल के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. राहुल शर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली प्रतिक्रिया युवाओं के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करती है। लगातार लाइक्स और व्यूज की चाह में जोखिम लेने का व्यवहार बढ़ सकता है। जब सोशल मीडिया का इस्तेमाल नियंत्रण से बाहर होकर रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगे, तब मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन और समय पर काउंसलिंग जरूरी है।




















