134 मासूम, कम पड़ गए बेड! 27 बच्चों की मौत के बाद बालाघाट जिला अस्पताल में फिर संकट

बालाघाट। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल बालाघाट जिले में बच्चों की बिगड़ती सेहत ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ समय में 27 बच्चों की मौत के बाद अब बड़ी संख्या में बच्चे बीमार होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल में इस समय करीब 134 बच्चों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें मलेरिया, बुखार, उल्टी-दस्त, डायरिया, खसरा और सर्दी-खांसी से पीड़ित बच्चे शामिल हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 50 बेड वाले अस्पताल में कई जगह एक बेड पर तीन से चार बच्चों का इलाज करना पड़ रहा है। 13 बच्चे PICU में भर्ती बताए गए हैं।
50 बेड के अस्पताल में बढ़ा दबाव
बालाघाट जिला अस्पताल में बच्चों की संख्या अचानक बढ़ने से व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है। सामान्य दिनों में रोज करीब 20 से 30 बच्चे भर्ती होते थे, लेकिन अभी मरीजों की संख्या इससे काफी ज्यादा है। अस्पताल में उपलब्ध बेड कम पड़ने के कारण एक ही बेड पर कई बच्चों को रखना पड़ रहा है। परिजन भी जगह की कमी को लेकर परेशान हैं।
कई बीमारियों से जूझ रहे मासूम
अस्पताल में भर्ती बच्चों में अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। कुछ बच्चे मलेरिया से पीड़ित हैं तो कई को बुखार, उल्टी-दस्त और डायरिया की शिकायत है। कुछ बच्चों में शरीर पर दाने और खसरे जैसे लक्षण भी बताए गए हैं। लगातार बीमार पड़ रहे बच्चों के कारण दूर गांवों से परिवार जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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गांवों में पानी और इलाज की समस्या
सोनगुड्डा से बेटी का इलाज कराने पहुंचे एक परिजन ने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं और पीने के पानी की समस्या बताई। उनका कहना है कि इलाके में कई लोग मलेरिया से परेशान हैं। नल-जल योजना होने के बावजूद कुछ वार्डों में पानी नहीं पहुंच रहा है और लोगों को हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
100 किलोमीटर दूर से बच्चे लेकर अस्पताल पहुंच रहे परिवार
बालाघाट के कई दूरस्थ इलाकों से परिजन बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। कुछ परिवारों को इलाज के लिए 100 किलोमीटर से ज्यादा का सफर करना पड़ रहा है। लंबे सफर के बाद अस्पताल पहुंचने पर भीड़ और बेड की कमी उनकी परेशानी और बढ़ा रही है। कई गांवों के बच्चों के एक साथ बीमार होने से स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल भी उठ रहे हैं।
डेढ़ महीने से लगातार आ रहे मरीज
सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के अनुसार, प्रभावित गांवों से करीब डेढ़ महीने से लगातार बीमार बच्चों को अस्पताल लाया जा रहा है। इलाज के बाद कुछ बच्चे वापस गांव जाते हैं, लेकिन दोबारा तबीयत बिगड़ने पर उन्हें फिर अस्पताल लाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त बेड और स्टाफ नर्स की व्यवस्था के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा है।
27 मौतों के बाद भी खत्म नहीं हुआ संकट
जून के आखिरी सप्ताह से बालाघाट के प्रभावित इलाकों में बच्चों की मौत का सिलसिला चिंता का कारण बना हुआ है। अब तक करीब 27 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें बैगा और गोंड समुदाय के बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और बीमार बच्चों तक इलाज पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
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मोबाइल मेडिकल यूनिट पर भी उठे सवाल
बालाघाट में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर मोबाइल मेडिकल यूनिट पर भी सवाल उठे हैं। क्षेत्रीय विधायक संजय उइके के अनुसार, जिले के लिए छह मोबाइल मेडिकल यूनिट स्वीकृत हैं, लेकिन सभी यूनिट जमीन पर सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने व्यवस्था और फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। दूरस्थ गांवों में समय पर इलाज पहुंचाना इस पूरे संकट में बड़ी चुनौती बना हुआ है।



















