जंतर-मंतर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :CJI बोले- जिम्मेदारों की तय होगी जवाबदेही, निष्पक्ष जांच के लिए बनेगी हाई पावर कमेटी

जंतर-मंतर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन अगर किसी के साथ ज्यादती हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय (हाई पावर) जांच समिति बनाई जाएगी।
CJI बोले- जिम्मेदारी तय होना जरूरी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ जांच कर देना काफी नहीं है, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि जिम्मेदार कौन है। अगर जवाबदेही तय नहीं होगी तो जांच का कोई मतलब नहीं रहेगा।
पेलेट गन और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में कई गंभीर आरोपों का जिक्र किया गया। इनमें शामिल हैं-
- पेलेट गन के इस्तेमाल से 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी जाने का आरोप।
- इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल का दावा।
- एक युवती के ICU में भर्ती होने का मामला।
- कील लगी लाठियों से हमला करने के आरोप।
- एक मीडियाकर्मी के साथ कथित मारपीट।
- सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा कार्रवाई के आरोप।
- बिना किसी उकसावे के एक युवती को थप्पड़ मारने का दावा।
- कोर्ट ने कहा कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सरकार बोली- छात्रों पर बल प्रयोग को हल्के में नहीं ले रहे
केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों पर बल प्रयोग को हल्के में नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने ज्यादती की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान करीब 250 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उनका कहना था कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल थे और सरकार उनके बारे में जानकारी कोर्ट के सामने रखेगी। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इसी वजह से निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
SIT और हाई पावर कमेटी पर हुई चर्चा
- सुनवाई के दौरान जांच समिति के गठन को लेकर भी बहस हुई।
- तुषार मेहता ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) के सदस्यों के नाम अदालत तय करे।
- वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दो पूर्व चीफ जस्टिस के नाम सुझाए।
- मेहता ने कहा कि सरकार किसी नाम का विरोध नहीं करना चाहती।
- दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने पर भी सरकार ने आपत्ति नहीं जताई।
- इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत इस मामले में हाई पावर जांच समिति का गठन करेगी।
देशभर के प्रदर्शन का मुद्दा भी उठा
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश, नागपुर, बिहार समेत कई राज्यों में प्रदर्शन के दौरान ऐसी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों की पहचान की गई है।
बिहार में नाबालिगों की हिरासत का मुद्दा
सुनवाई के दौरान बिहार का मामला भी उठा। वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने कहा कि राज्य सरकार ने कुछ मामलों में FIR वापस लेने की बात कही है, लेकिन 150 से ज्यादा नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बच्चों को तय समय से ज्यादा हिरासत में रखा गया और एक बच्चे की उम्र सिर्फ 13 साल है।
फिलहाल क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाएगी। अदालत का कहना है कि जांच का उद्देश्य सिर्फ घटनाओं की जानकारी जुटाना नहीं, बल्कि यह तय करना भी होगा कि यदि कहीं ज्यादती हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए।











