PU Special :बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट की एक साल पहले ही पुलिस को लगी थी भनक, रियल चौधरी को मिली थी क्लीन चिट

बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनवाने के मामले की भनक भोपाल पुलिस को एक साल पहले ही लग गई थी, लेकिन तब भंते मेतानंद बना रियल चौधरी पुलिस की कार्रवाई से बच निकला था। वेरिफिकेशन के फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद रियल चौधरी ने 5 पासपोर्ट आवेदकों के लिए अपनी सिफारिश वापस ले ली थी और पुलिस ने उसे क्लीन चिट दे दी थी।
बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट की एक साल पहले ही पुलिस को लगी थी भनक, रियल चौधरी को मिली थी क्लीन चिट
बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट की एक साल पहले ही पुलिस को लगी थी भनक

विजय एस. गौर, भोपाल। यह दावा अशोक बौद्ध विहार, अन्ना नगर के प्रमुख एवं व्यवस्थापक कमेटी के अध्यक्ष भीमराव पटाइत ने पीपुल्स समाचार से बातचीत में किया है। एसटीएफ के खुलासे में सामने आया कि 40 पासपोर्ट भोपाल से, 17 पासपोर्ट डबरा से, 11 पासपोर्ट बैतूल से और 1-1 पासपोर्ट छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से बने। सभी में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया और इस नेटवर्क में पहले से गिरफ्तार रियल चौधरी और विप्लव अधिकारी से पूछताछ के बाद पुलिस ने दलाल जॉय चौधरी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने प्रियान अधिकारी को भी पकड़ा है, जिसका पासपोर्ट डबरा के फर्जी पते पर बना था और उसने बताया कि उसके पूर्वज बांग्लादेशी थे। मामले में डबरा थाना और नगर पालिका, आमला थाना और नगर पालिका तथा गोविंदपुरा थाना और नगर निगम भोपाल जांच के दायरे में हैं। एसटीएफ अब पासपोर्ट वेरिफिकेशन में शामिल पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

एक ही पता और एक ही गवाह से बने पासपोर्ट

दरअसल, उस समय जब वेरिफिकेशन के लिए फाइल पुलिस के पास गई तो इंटेलिजेंस को खबर लगी कि कुछ पासपोर्ट एक ही पता और एक ही गवाह के आधार पर बन रहे हैं। पुलिस जांच करने पहुंची तो रियल चौधरी ने लिखित में दिया कि उन्हें जानकारी नहीं थी और सिफारिश वापस ले ली। पुलिस ने भी विश्वास कर लिया। बाद में एसटीएफ के खुलासे में सामने आया कि 40 पासपोर्ट भोपाल से, 17 पासपोर्ट डबरा से, 11 पासपोर्ट बैतूल से और 1-1 पासपोर्ट छिंदवाड़ा और पांढुर्णा से बने हैं। सभी में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया।

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जांच के बाद जॉय चौधरी और प्रियान अधिकारी गिरफ्तार

इस नेटवर्क में पहले से गिरफ्तार रियल चौधरी और विप्लव अधिकारी से पूछताछ के बाद पुलिस ने दलाल जॉय चौधरी को गिरफ्तार किया है। वहीं पुलिस ने प्रियान अधिकारी को भी पकड़ा है। प्रियान वही आरोपी है जिसका पासपोर्ट डबरा के फर्जी पते पर बना था। प्रियान ने बताया कि उनके पूर्वज बांग्लादेशी थे। 

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एक ही पता और गवाह के बावजूद वेरिफिकेशन कैसे हुआ

मामले में सवाल उठ रहे हैं कि एक ही पता और एक ही गवाह होने के बावजूद वेरिफिकेशन कैसे हो गया। सभी आवेदकों को बौद्ध दर्शाया गया, जबकि अशोक बौद्ध विहार में केवल एक कमरा प्रबंधक और एक चौकीदार के लिए है। 40 आवेदकों की गवाही देने वाला भंते मेतानंद उर्फ रियल चौधरी खुद को ग्राम बोरखी, आमला, जिला बैतूल का बताता था। ऐसे में उसकी गवाही पर भोपाल में पासपोर्ट आवेदनों का वेरिफिकेशन कैसे हो गया, यह भी बड़ा सवाल है।

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ऐसे किया गया पासपोर्ट का फर्जीवाड़ा

एसटीएफ के अनुसार बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिक दर्शाकर पासपोर्ट बनवाने के लिए कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र तैयार किए गए। इसके लिए बांग्लादेशी मुस्लिमों ने खुद को बौद्ध दर्शाते हुए डबरा नगर पालिका और आमला नगर पालिका से 10वीं की फर्जी मार्कशीट लगाकर निवास प्रमाण पत्र बनवाए। इसके बाद आधार और मतदाता परिचय पत्र बनवाए गए। बाद में इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल पासपोर्ट आवेदनों में किया गया, जिनकी गवाही भंते मेतानंद बने रियल चौधरी ने दी। सूत्रों के मुताबिक नगर निगम भोपाल से भी ऐसे ही फर्जी दस्तावेज लगाकर निवास और फिर आधार बनवाए गए।

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रियल चौधरी की क्राइम कुंडली और पुलिसकर्मियों की भूमिका

1971 में बांग्लादेश से रियल चौधरी का परिवार असम के कामरूप जिले में बस गया और पहचान छिपाकर एक बौद्ध मठ से जुड़ गया। 7-8 साल पहले बैतूल जिले की आमला तहसील में पहुंचा और ग्राम बोरखी में बौद्ध विहार बनवाया। इसके बाद भोपाल आ गया। उसका एक बेटा और एक बेटी है। ग्वालियर जिले के देहात क्षेत्र के डबरा थाने में फर्जी पासपोर्ट बनने के दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर सहित बदलते रहे बीट प्रभारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एसटीएफ के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन के दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय की लापरवाही भी सामने आई है। तत्कालीन डबरा टीआई विनायक शुक्ला वर्तमान में दतिया जिले में बड़ौनी एसडीओपी पदस्थ हैं, जबकि आरक्षक भूपेंद्र की तैनाती जिले के पिछोर थाने में है। मामले में एसटीएफ ने तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभागीय पत्राचार किया है। वहीं भोपाल में गोविंदपुरा थाने से संबंधित पुलिस वालों की सूची बनाई है। जांच के दायरे में तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार थे। आमला थाने के वेरिफिकेशन करने वाले पुलिसवालों की सूची भी मंगाई गई है। विनायक शुक्ला और अशोक सिंह परिहार से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हुआ।

एसटीएफ बोली-पुलिसकर्मियों की लापरवाही रही

एसपी एसटीएफ ग्वालियर राजेश भदौरिया ने कहा, फर्जी पासपोर्ट मामले में दो अन्य गिरफ्तारियां हुई हैं, जिसमें एक आरोपी फर्जी कागजात पर भारतीय पासपोर्ट बनवाने वाला है। रैकेट में शामिल अन्य 69 पासपोर्ट धारकों की पहचान कर ली गई है। डबरा थाने के तत्कालीन पुलिसकर्मियों की लापरवाही रही है। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विभागीय पत्राचार कर दिया गया है।” डीआईजी एसटीएफ राहुल लोढ़ा ने कहा, वेरिफिकेशन में शामिल संबंधित थानों के पुलिस कर्मचारियों और थाना प्रभारियों की जांच हो रही है। सभी की भूमिका देखने के बाद सख्त कार्रवाई होगी।” आमला के वार्ड-13, भीमनगर के पार्षद अमित हूरमाड़े ने बताया, रियल चौधरी आमला के लोगों को खुद को असम के डिब्रूगढ़ का रहने वाला बताता था। वह 2018 में भिक्षु बनकर आमला आया था। इसके बाद भोपाल चला गया और अन्नानगर बौद्ध विहार में रहने लगा। कभी-कभी आमला भी आता था। बीते 10 अगस्त को वह आमला आया था, उसके बाद एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया। एडवोकेट पीसी कोठारी का कहना है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए असत्य और फर्जी दस्तावेज लगाने पर धारा 316 और 318 बीएनएस के तहत 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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