PU Special :काउंसलिंग का असर, छह साल से मां से नफरत करने वाला बेटा बोला- हर महीने कुछ समय मां-बहन के साथ रहूंगा

भोपाल फैमिली कोर्ट में अगस्त 2024 से शुरू काउंसलिंग पहल ने अलग रह रहे माता-पिता और बच्चों के रिश्तों में सुधार की नई राह खोली है। दो साल में भोपाल के करीब 35 और प्रदेशभर में लगभग 90 बच्चों के व्यवहार व रिश्तों में बदलाव आया। काउंसलिंग से बच्चों में गुस्सा, नफरत, असुरक्षा और आक्रामकता कम करने में मदद मिली।
काउंसलिंग का असर, छह साल से मां से नफरत करने वाला बेटा बोला- हर महीने कुछ समय मां-बहन के साथ रहूंगा
प्रतीकात्मक चित्र।

पल्लवी वाघेला, भोपाल। मां-बाप का रिश्ता टूटता है तो उसका सबसे गहरा असर बच्चे के मन पर पड़ता है। कभी एक अभिभावक से दूरियां बढ़ती हैं तो कभी बच्चे के मन में दूसरे के लिए नफरत भर दी जाती है। लेकिन ऐसे बच्चों के लिए भोपाल फैमिली कोर्ट में शुरू की गई काउंसलिंग ने कई बच्चों की कहानी बदल दी है।  अगस्त 2024  से भोपाल फैमिली कोर्ट में शुरू इस पहल के बाद करीब 35 बच्चों और वहीं, भोपाल की तर्ज पर पिछले साल से प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुरू हुई इस व्यवस्था के चलते  प्रदेशभर में करीब 90 बच्चों के अपने माता-पिता से रिश्ते सुधरे हैं। इनमें से कई डिप्रेशन से बाहर आए हैं और ज्यादातर  बच्चों के आक्रामक व्यवहार में भी बदलाव आया है।

संपर्क रोकना बनता है वजह

अकेले भोपाल फैमिली कोर्ट में हर माह बच्चों की कस्टडी या दूसरे अभिभावक से मुलाकात की मांग से जुड़े करीब 20 से 22 मामले पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जहां कस्टडी हासिल करने वाला अभिभावक बच्चे को दूसरे से मिलने नहीं देता। यही वजह है कि  मीडिएशन सेंटर में  मुलाकात स्थल को काउंसलिंग सेंटर की तरह बदला गया।  यहां काउंसलर्स मुलाकात के दौरान बच्चे के व्यवहार, उसकी झिझक, नाराजगी और भावनात्मक स्थिति पर नज़र रखते हैं।

केस-1: ‘मुझे लगा न मुझसे प्यार है न जरूरत’

भोपाल जिले के मामले में 14 साल का बेटा छह साल से मां से नहीं मिला था। मां ने कोर्ट में मुलाकात की गुहार लगाई तो पिता के साथ रह रहे बेटे ने साफ मना कर दिया। उसे काउंसलिंग में बुलाया गया। काउंसलर ने पूछा – तुम मां से इतने नाराज क्यों हो? बेटे ने कहा- उन्होंने केवल बहन को अपने साथ रखा मुझे नहीं। मुझे लगा न उन्हें मुझसे प्यार है न मेरी जरूरत। दरअसल, दो साल की बेटी की कस्टडी मां को और बेटे की पिता को मिली थी। पिता ने इतने साल मां से मिलने नहीं दिया और बेटे के मन में बैर पनपने लगा। धीरे-धीरे काउंसलिंग में बच्चे को समझाया गया कि माता-पिता का रिश्ता खत्म होना और मां-बेटे का रिश्ता खत्म होना दो अलग बातें हैं। दो मुलाकातों के बाद उसका रवैया बदलने लगा। उसने कहा कि वह हर माह कुछ समय मां और बहन के साथ रहना चाहता है।

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केस- 2: दस साल के बच्चे के व्यवहार में दिखा परिवर्तन 

ग्वालियर से जुड़े मामले में माता-पिता साथ रह रहे थे, लेकिन उनके बीच कानूनी विवाद चल रहा था। घर का तनाव दस साल के बच्चे के व्यवहार में दिखाई देने लगा। वह मारपीट और चीजें तोड़ने लगा। पेशी के दौरान मीडिएशन सेंटर में माता-पिता बहस करते हुए बच्चे पर विवाद करने लगे। मां ने कहा- ये बहुत चिड़चिड़ा हो गया है। किसी की बात नहीं मानता। पिता ने कहा – यह तुम्हारी गलत परवरिश के कारण है। इसे देख काउंसलर ने बच्चे से बात की। उन्होंने पूछा - तुम दूसरे बच्चों को क्यों मारते हो? बच्चे ने कुछ देर में कहा – घर में भी तो सब लड़ते हैं। मुझे भी गुस्सा आता है। काउंसलर ने उसे समझाया कि मम्मी-पापा के बीच चल रहा विवाद उसकी गलती नहीं है और घर की लड़ाई का गुस्सा दूसरे बच्चों पर निकालना सही नहीं है। इसके साथ ही माता-पिता को भी समझाया कि बच्चे के सामने एक-दूसरे को गलत साबित करने की कोशिश न करें। करीब छह महीने बाद माता-पिता ने बताया कि बच्चे के व्यवहार में बदलाव आया है।

बच्चे के मन में न भरे कड़वाहट

तलाक या लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में बच्चे को यह महसूस कराना जरूरी है कि माता-पिता के अलग होने के बावजूद दोनों का प्यार उसके लिए कायम है। यदि एक अभिभावक लगातार दूसरे के खिलाफ बच्चे से बातें करता है या मुलाकात रोकता है तो बच्चे में गुस्सा, अपराध बोध, असुरक्षा, चिंता और दूसरे अभिभावक के प्रति नफरत विकसित हो सकती है। काउंसलिंग में बच्चे को यह समझाने पर जोर दिया जाता है कि माता-पिता का आपसी विवाद उसकी गलती नहीं है। साथ ही अभिभावकों को भी सलाह दी जाती है कि वे बच्चे के सामने एक-दूसरे को नीचा न दिखाएं और उसे किसी पक्ष को चुनने के लिए मजबूर न करें।

शैल अवस्थी, काउंसलर फैमिली कोर्ट

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ये आती है परेशानी

  • बच्चे पर मां या पापा में से किसी एक को चुनने’ का दबाव।
  • दूसरे अभिभावक से मिलने की इच्छा दबाने से अग्रेशन। 
  • माता-पिता के झगड़ों के लिए खुद को दोषी मानना।
  • व्यक्तित्व में नकारात्मकता, गुस्सा और जिद।
  • किसी एक अभिभावक के प्रति गलत धारणा जो कई बार नफरत की तरह सामने आती है। 
  • रिश्ते होते हुए भी दूरी का दर्द, जिससे बच्चे और माता-पिता दोनों गुजरते हैं।
  • माता-पिता के सामने अलगाव और कानूनी लड़ाई के बीच बच्चे के व्यवहार को संभालने की चुनौती।
Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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