सिकल सेल की पहचान का आसान तरीका, नम्बिसन दंपती के नवाचार को हार्वर्ड की पुस्तक में मिली जगह

भोपाल। वर्ष 2018 में नम्बिसन दंपती की टीम ने करीब 25 हजार लोगों की घर-घर जाकर जांच की थी। इस दौरान सामने आया कि रिपोर्ट देने के साथ परिवारों को आने वाली पीढ़ियों पर बीमारी के असर को समझाना भी जरूरी है। इसी जरूरत से जीआईपीसीआई कार्ड विकसित किया गया, जो रंगों और विशेष छेदों की मदद से आनुवंशिक जोखिम को आसानी से समझाता है।
जनजातीय क्षेत्रों में घर-घर जाकर हुई जांच
भोपाल के चिकित्सक दंपती ने सिकल सेल बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए समय पर जांच और सही आनुवंशिक जानकारी की जरूरत को समझते हुए जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में काम किया। वर्ष 2018 में उनकी टीम ने करीब 25 हजार लोगों की घर-घर जाकर जांच की और लोगों को बीमारी से जुड़ी जानकारी भी दी।
ये भी पढ़ें: यूरिया चोरी का आरोप, कंधे पर बोरी बांधकर निकाला जुलूस,ढोल-नगाड़ों के बीच VIDEO वायरल
जांच के साथ खतरा समझाना भी जरूरी
डॉ. निशांत ने बताया कि उनका काम सिकल सेल की केवल जांच तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि जांच की जानकारी मिलने के बाद जनजातीय और ग्रामीण परिवारों को बीमारी और आने वाली पीढ़ियों के जोखिम को आसानी से कैसे समझाया जाए।
जांच के दौरान सामने आईं व्यावहारिक दिक्कतें
लोगों के बीच जागरूकता और स्क्रीनिंग के दौरान कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आईं। इसके बाद जांच में मिली जानकारी और परिवारों को समझाने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जीआईपीसीआई कार्ड तैयार किया गया, ताकि जटिल आनुवंशिक जानकारी को आसान बनाया जा सके।
रंगों और पंच-होल से समझाया आनुवंशिक स्टेटस
जीआईपीसीआई कार्ड में रंगों और पंच-होल की मदद से यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी व्यक्ति में सिकल सेल का कौन-सा आनुवंशिक स्टेटस है। साथ ही दंपती के बच्चों में बीमारी का खतरा किस तरह हो सकता है, इसे भी आसानी से समझाने की कोशिश की गई।
सामान्य परिवारों के लिए आसान तरीका
इस नवाचार का उद्देश्य जटिल आनुवंशिक जानकारी को ऐसी भाषा और दृश्य संकेतों में बदलना था, जिसे सामान्य परिवार भी आसानी से समझ सके। सिकल सेल से जुड़े जोखिम की जानकारी को सरल तरीके से समझाने के कारण यह तरीका जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हुआ।
ये भी पढ़ें: महिला की मौत के बाद गांव में बवाल! अंतिम संस्कार पर रोक,बोले- पहले हिंदू बनो
'कर्व्ड एयर' में हुआ काम का उल्लेख
अब नम्बिसन दंपती के इस काम का उल्लेख विज्ञान लेखक केविन डेविस की पुस्तक 'कर्व्ड एयर' में किया गया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में मध्यप्रदेश के जमीनी स्वास्थ्य प्रयास को जगह मिलना राज्य के लिए बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान मानी जा रही है।




















