PU Special :सिंहस्थ में रोज 7 लाख लीटर दूध सप्लाई करेगा डेयरी फेडरेशन, भोपाल-इंदौर में 30 हजार टन पाउडर प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने की तैयारी

अशोक गौतम,भोपाल। सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की दूध की जरूरत पूरी करने के लिए मध्यप्रदेश को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ने तैयारी शुरू कर दी है। फेडरेशन ने प्रतिदिन करीब 7 लाख लीटर दूध की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए उज्जैन, इंदौर और भोपाल में कलेक्शन, चिलिंग, प्रोसेसिंग, संरक्षण और वितरण की पूरी चेन विकसित करने का रोडमैप तैयार किया है। इसके साथ ही अगले पांच साल में प्रदेश में दूध कलेक्शन को करीब पांच गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
उज्जैन में 3 लाख लीटर क्षमता का प्लांट
सिंहस्थ को देखते हुए सबसे ज्यादा फोकस उज्जैन पर है। यहां प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता का नया मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किया जा रहा है। जरूरत बढ़ने पर इसकी क्षमता को 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। उज्जैन में पहले से ही 2 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का प्रोसेसिंग सेंटर है। नए प्लांट से सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाली दूध की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
भोपाल-इंदौर में बढ़ेगी पाउडर प्रोसेसिंग क्षमता
प्रदेश में फिलहाल ग्वालियर और इंदौर में दूध पाउडर प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध है। अब भोपाल और इंदौर में अतिरिक्त क्षमता विकसित की जा रही है। दोनों स्थानों पर करीब 30 हजार मीट्रिक टन पाउडर प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करने की योजना है। इससे अतिरिक्त दूध को लंबे समय तक संरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार उसकी आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। फेडरेशन का रोडमैप केवल सिंहस्थ तक सीमित नहीं है बल्कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से अगले 5 से 7 वर्षों में करीब 3 हजार करोड़ रुपए के निवेश की योजना है।
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एनडीडीबी के सहयोग से यह होगा काम
- नई दुग्ध समितियों का गठन
- किसानों से दूध कलेक्शन बढ़ाना
- दूध की गुणवत्ता जांच की व्यवस्था मजबूत करना
- पांच साल में दूध कलेक्शन बढ़ाकर 52 लाख लीटर प्रतिदिन करना
- मौजूदा 11 लाख लीटर प्रतिदिन कलेक्शन को बढ़ाकर 52 लाख लीटर करना
- डेयरी प्लांटों की प्रोसेसिंग क्षमता 18 लाख से बढ़ाकर करीब 32 लाख लीटर प्रतिदिन करना
- अतिरिक्त दूध की प्रोसेसिंग निजी प्लांटों के जरिए कराना
लोन और अनुदान से जुटाई जाएगी राशि
- बैंक/ बाजार लोन: 1,250 करोड़
- केंद्र से अनुदान लेंगे: 400 करोड़ रुपए
- मैचिंग ग्रांड (भारत सरकार): 250 करोड़
- राज्य सरकार से लेंगे: 500 करोड़
- पीपीपी और निजी सोर्स: 600 करोड़
- कुल-3,000 करोड़
ऐसे होगा खर्च
- इंफ्रास्ट्रक्चर: 1,500 करोड़
- संसाधन जुटाना: 700
- ट्रेनिंग आदि: 500 करोड़
- मार्केटिंग पर: 300 करोड़
- कुल-3,000 करोड़
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