PU Special :अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज, आबकारी विभाग के सामने सरकारी वाहनों की कमी बड़ी चुनौती

संतोष चौधरी, भोपाल। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को शराब ठेकेदारों के वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे कार्रवाई की स्वतंत्रता और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
वित्त विभाग का फरमान आया आड़े
आबकारी विभाग के पास कुछ समय पहले तक करीब 400 वाहन थे। लेकिन वित्त विभाग से मिले वित्तीय खर्चों में कटौती के चलते वाहनों की संख्या घटकर 191 रह गई है। मौजूदा व्यवस्था में 55 जिलों के लिए तीन-तीन के हिसाब से 165 वाहन, सात संभागीय मुख्यालयों के लिए दो-दो के हिसाब से 14 वाहन और राज्य स्तर पर 12 वाहन उपलब्ध हैं।
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बड़े संभागों में एक वाहन पर कई सर्कल
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे बड़े संभागों में कई आबकारी सर्कल हैं। सीमित वाहनों के कारण एक साथ अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करना मुश्किल होता है। विभागीय अमले के अनुसार कई बार संभागीय टीमों और उड़नदस्तों को कई सर्कलों का क्षेत्र एक ही वाहन से कवर करना पड़ता है।
एक वाहन से कई इलाकों को कवर करने की मजबूरी
ऐसे में एक स्थान पर कार्रवाई चल रही हो और दूसरे क्षेत्र से अवैध शराब की सूचना मिल जाए तो टीम को तत्काल मौके पर भेजना चुनौती बन जाता है। सरकारी वाहनों की कमी के कारण मैदानी अमले के सामने कार्रवाई के दौरान लगातार परेशानी बनी हुई है।
ठेकेदारों के वाहनों के इस्तेमाल पर सवाल
मैदानी स्तर पर ठेकेदारों के वाहनों के इस्तेमाल को लेकर भी विभाग के कर्मचारियों में चिंता है। कारोबार से जुड़े व्यक्ति के वाहन का इस्तेमाल करना विभाग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर सकता है।
वाहनों की कमी दूर करने की मांग
भोपाल जिला सहायक आबकारी आयुक्त ने मैदानी अमले को एक साथ मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के अन्य जिलों से भी आबकारी आयुक्त को पत्र भेजकर वाहनों की कमी दूर करने की मांग की गई है।




















