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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कांवड़ यात्रा मार्ग पर QR कोड लगाने पर नहीं लगेगी रोक, कोर्ट ने खारिज की याचिका

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के निर्देश यथावत रहेंगे
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कांवड़ यात्रा मार्ग पर QR कोड लगाने पर नहीं लगेगी रोक, कोर्ट ने खारिज की याचिका
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर ढाबों और रेस्टोरेंट्स के बाहर QR कोड लगाने के आदेश पर स्थगन देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा समाप्त हो रही है, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने यह निर्देश शिक्षाविद् अपूर्वानंद झा और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के आदेश को चुनौती दी गई थी।

    QR कोड लगाने की अनिवार्यता को दी गई चुनौती

    याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 25 जून को जारी किए गए प्रेस नोट में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों को अपने मालिकों की पहचान दर्शाने के लिए QR कोड लगाने को अनिवार्य किया गया है। उनका आरोप है कि इस तरह के निर्देश सांप्रदायिक भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और निजता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। याचिका में कहा गया कि ऐसा आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले निजता के अधिकार के खिलाफ है।

    लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की वैधता पर जोर

    जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोर्ट केवल यही आदेश पारित करेगा कि सभी ढाबा और होटल मालिक अपने लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र नियमानुसार प्रदर्शित करें। कोर्ट ने QR कोड और मालिक की पहचान उजागर करने जैसे अन्य मुद्दों पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की। पीठ ने कहा, “हमें बताया गया है कि यात्रा का आज अंतिम दिन है… इसलिए इस स्तर पर हम केवल यही कह सकते हैं कि सभी होटल मालिक वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करें।”

    पिछले साल सुप्रीम कोर्ट दे चुका है राहत

    2024 में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश सरकारों के उन आदेशों पर रोक लगा दी थी जिनमें कांवड़ मार्ग पर भोजनालयों को मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करने के लिए बाध्य किया गया था। लेकिन इस बार मानसून कांवड़ यात्रा के दौरान QR कोड लगाने की व्यवस्था की गई थी, ताकि यात्रियों को ‘साफ और शुद्ध भोजन’ मिल सके और अवांछित तत्वों की पहचान की जा सके।

    धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य का है सवाल

    राज्य सरकारों की ओर से कहा गया कि श्रावण माह में श्रद्धालु विशेष प्रकार का भोजन करते हैं, जैसे कि मांसाहार और प्याज-लहसुन रहित भोजन। ऐसे में भोजनालयों की पहचान सुनिश्चित करना और रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना जरूरी है ताकि यात्रियों की आस्था और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा हो सके। QR कोड से ढाबों के वैध संचालन की पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा रही है।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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