शतक के बाद ध्रुव जुरेल का इमोशनल सेलिब्रेशन!‘जय जवान, जय किसान’ टैटू दिखाया, पिता-दादा को किया याद

श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने नाबाद 115 रन की शानदार पारी खेली। लेकिन उनके लिए यह शतक सिर्फ एक क्रिकेट रिकॉर्ड नहीं था। शतक पूरा करने के बाद जुरेल ने अपनी बांह पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ का टैटू दिखाया और अपने पिता को सलाम किया। जुरेल का यह जश्न उनके परिवार और उनकी जड़ों से जुड़ा हुआ था। उन्होंने बताया कि उनका यह शतक उनके सैनिक पिता और किसान दादा को समर्पित है। उनके पिता नेम चंद भारतीय सेना में रह चुके हैं और उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में भी देश की सेवा की थी। वहीं, उनके दादा किसान थे।
‘जय जवान, जय किसान’ टैटू के पीछे है खास कहानी
ध्रुव जुरेल ने बताया कि उनके लिए किसान और जवान उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी जड़ हैं। उनके पिता ने देश की रक्षा के लिए सेना में सेवा दी, जबकि उनके दादा ने खेती करके परिवार को संभाला। इसी वजह से जुरेल ने अपनी बांह पर ‘जय जवान, जय किसान’ का टैटू बनवाया है। शतक लगाने के बाद उन्होंने इसी टैटू को दिखाकर अपने पिता और दादा को याद किया। ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में दिया था। जुरेल के लिए यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उनके परिवार और उनकी पहचान से जुड़ा हुआ संदेश है।
कारगिल युद्ध में पिता ने की थी देश की सेवा
ध्रुव जुरेल के पिता नेम चंद भारतीय सेना में रह चुके हैं। उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी देश की सेवा की थी। जुरेल के लिए उनके पिता की सैन्य पृष्ठभूमि हमेशा गर्व का विषय रही है। वहीं, उनके दादा किसान थे। इसलिए जुरेल के लिए ‘जवान’ और ‘किसान’ दोनों शब्द उनके परिवार की कहानी को दर्शाते हैं। शतक के बाद सलाम करते हुए जुरेल ने अपने पिता के साथ-साथ अपने दादा को भी याद किया।
टीम में जगह को लेकर उठ रहे थे सवाल
ध्रुव जुरेल का यह शतक ऐसे समय आया है, जब भारतीय टेस्ट टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा चल रही थी। जुरेल ने अपने प्रदर्शन से एक बार फिर खुद को साबित किया। उन्होंने 177 गेंदों पर नाबाद 115 रन बनाए। उनकी इस पारी की मदद से भारत ने 503/9 के स्कोर पर पारी घोषित की। यह जुरेल के टेस्ट करियर का दूसरा शतक है। उनकी पारी में धैर्य के साथ-साथ मौके मिलने पर आक्रामक बल्लेबाजी भी देखने को मिली।
पंत से सलाह लेना पसंद करते हैं जुरेल
ध्रुव जुरेल को भारतीय टीम में अक्सर ऋषभ पंत के बैकअप विकेटकीपर के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में उन्हें पंत के साथ रहने और खेलने से काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है। जुरेल ने बताया कि वह बल्लेबाजी से जुड़ी परिस्थितियों में पंत से सलाह लेना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, पंत ने भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे मुश्किल दौरों में शानदार प्रदर्शन किया है और उनके पास काफी अनुभव है। इसी वजह से जुरेल पंत की सलाह को काफी अहम मानते हैं।
पंत की तरह खेलने की कोशिश नहीं करते
हालांकि, जुरेल ने साफ किया कि वह ऋषभ पंत की बल्लेबाजी शैली की नकल नहीं करना चाहते। उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती अलग-अलग खिलाड़ियों के अलग-अलग अंदाज में खेलने में है। जुरेल अपनी बल्लेबाजी के दौरान गेंदबाजों को समझने की कोशिश करते हैं। वह यह देखते हैं कि कौन सा गेंदबाज किस तरह गेंदबाजी कर रहा है और किसके खिलाफ आक्रामक शॉट खेले जा सकते हैं।




















