नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारतीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूयॉर्क सिटी के नए मेयर जोहरान ममदानी की व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात की तारीफ की है। थरूर ने इसे लोकतंत्र की असली भावना बताते हुए कहा कि, चुनावों के दौरान तीखी बहस और मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब जनता अपना फैसला सुना दे, तो सभी राजनीतिक दलों को राष्ट्रहित में साथ खड़ा होना चाहिए।
थरूर ने दोनों नेताओं का वीडियो शेयर करते हुए X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि, चुनाव में सभी पार्टियां अपने विचारों के लिए जोश और जुनून के साथ लड़ें, लेकिन एक बार चुनाव खत्म हो जाए तो राष्ट्रहित में एक-दूसरे का सहयोग करना सीखें। मैं भारत में भी ऐसा ही देखना चाहता हूं। थरूर ने साफ किया कि मतभेद चुनाव तक सीमित रहें, उसके बाद देश की सेवा सबका साझा लक्ष्य होना चाहिए।
भाजपा ने भी थरूर के बयान की तारीफ की। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि, थरूर ने अपनी पोस्ट के जरिए कांग्रेस के नेताओं को यह याद दिलाया कि देश को पहले रखें, गांधी परिवार को नहीं।
थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वे बीते महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय पहलों और कुछ सरकारी कदमों की सराहना करने पर अपनी ही पार्टी में सवालों का सामना कर चुके हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने कई मौकों पर थरूर की इन टिप्पणियों से दूरी बनाई, जिससे अंदरूनी असहजता की स्थिति पैदा हुई।
ऐसे में उनका यह नया पोस्ट केवल अमेरिकी राजनीति पर प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस के भीतर संवाद और राजनीतिक शालीनता के महत्व पर अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
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शशि थरूर ने अब तक कई मौकों पर अपनी पार्टी की लाइन से हटकर बयान दिए हैं। इनमें कुछ प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
8 नवंबर: लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं
थरूर ने 8 नवंबर को आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, विनम्रता और आधुनिक भारत की दिशा तय करने में उनकी भूमिका अमिट है। उनका जीवन अनुकरणीय है।
3 नवंबर: वंशवाद पर टिप्पणी
थरूर ने अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन प्रोजेक्ट सिंडिकेट में लेख लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन चुकी है। उनका मानना है कि, जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, लोकतंत्र का सही अर्थ नहीं निकलेगा। उन्होंने पाकिस्तान (भुट्टो, शरीफ), बांग्लादेश (शेख और जिया परिवार) और श्रीलंका (बंदरानायके, राजपक्षे परिवार) में भी वंशवाद की प्रवृत्ति को रेखांकित किया।
6 सितंबर: पीएम मोदी के नए लहजे का स्वागत
भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद के बीच थरूर ने कहा कि, पीएम मोदी के नए लहजे को सावधानीपूर्वक स्वागत करना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी केरल के तिरुवनंतपुरम में ANI से बात करते हुए की थी।
10 जुलाई: इमरजेंसी को काला अध्याय बताया
थरूर ने मलयालम अखबार दीपिका में लिखा कि इमरजेंसी सिर्फ भारतीय इतिहास का काला अध्याय नहीं, बल्कि इससे सबक लेना जरूरी है। उन्होंने नसबंदी अभियान को मनमाना और क्रूर बताया। 1975 में सबने देखा कि आजादी कैसे खत्म की जाती है। आज का भारत, 1975 का भारत नहीं है। फिर भी इमरजेंसी की सीख आज भी कई मायनों में प्रासंगिक है।
23 जून: मोदी की ऊर्जा को भारत के लिए संपत्ति बताया
द हिंदू में थरूर ने लिखा कि मोदी की ऊर्जा, गतिशीलता और जुड़ने की क्षमता वैश्विक मंच पर भारत के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति है, लेकिन उन्हें और ज्यादा सहयोग मिलने की जरूरत है।
8 मई: ऑपरेशन सिंदूर की सराहना
थरूर ने कहा कि, ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और दुनिया के लिए मजबूत संदेश है। भारत ने 26 निर्दोष नागरिकों की मौत का बदला सटीक कार्रवाई से लिया।
19 मार्च: मोदी दोनों देशों को गले लगा सकते हैं
रायसीना डायलॉग में थरूर ने कहा कि, भारत का प्रधानमंत्री जेलेंस्की और पुतिन दोनों को गले लगा सकता है। भारत दोनों जगह स्वीकार्य है। थरूर ने यह भी माना कि यूक्रेन युद्ध पर भारत की आलोचना करना उनकी गलती थी।
15 फरवरी 2025: मोदी की अमेरिका यात्रा की प्रशंसा
पीएम मोदी के फरवरी 2025 के अमेरिकी दौरे पर थरूर ने कहा कि, इस यात्रा से व्यापार और सुरक्षा सहयोग में प्रगति हुई। उन्होंने इसे एक भारतीय होने के नाते सराहा।