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बिजली नहीं तो रास्ता नहीं! महोड़िया में ग्रामीणों ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर खोली विभाग की पोल

सीहोर के महोड़िया में बिजली संकट से परेशान ग्रामीणों ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोका। 500 रुपए जुटाकर लगवाया ट्रांसफार्मर भी खराब हुआ।
बिजली नहीं तो रास्ता नहीं! महोड़िया में ग्रामीणों ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर खोली विभाग की पोल

सीहोर। जिले के महोड़िया गांव में बिजली संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सड़कों पर दिखाई दिया। कई दिनों से बिजली की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जन विश्वास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राजस्व मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक करण सिंह वर्मा के काफिले को बीच रास्ते में रोक लिया।

ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में अपनी परेशानी सामने रखते हुए कहा कि जब गांव में बिजली व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं है तो उनकी समस्याओं का समाधान आखिर कौन करेगा? मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। गांव में व्याप्त बिजली संकट और खराब ट्रांसफार्मर को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा साफ नजर आया।

 बिजली संकट ने किया ग्रामीणों का जीना मुहाल

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से बिजली व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। बार-बार बिजली गुल होने और ट्रांसफार्मर खराब रहने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और घरों के जरूरी कामकाज तक बाधित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें लगातार विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। सवाल यह है कि जब गांव के लोग नियमित रूप से बिजली संबंधी समस्याएं उठा रहे हैं तो विभाग की ओर से समय रहते व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी गई?

किसानों की फसल पर संकट, सिंचाई के लिए मोटर पंप बंद

बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खेतों में खड़ी फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पा रहा है। मोटर पंप बंद पड़े होने के कारण किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेती पूरी तरह बिजली पर निर्भर है और ऐसे समय में बिजली की आपूर्ति बाधित होना उनकी मेहनत और फसल दोनों के लिए खतरा बन गया है।

एक तरफ किसान खेती की लागत और मौसम की मार से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग की बदहाल व्यवस्था ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर किसानों की इस परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा?

हर घर से 500 रुपए जुटाए, फिर भी नहीं मिली राहत

महोड़िया में बिजली व्यवस्था की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों को खुद अपनी जेब से पैसे जुटाकर ट्रांसफार्मर लगवाने की नौबत आ गई। ग्रामीण राम सिंह, लाल सिंह सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्होंने आपसी सहयोग से प्रत्येक घर से 500-500 रुपए एकत्रित किए और किसी तरह नया ट्रांसफार्मर रखवाया।

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब गांव में बिजली संकट खत्म होगा, लेकिन उनकी उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया, जब लगाया गया ट्रांसफार्मर महज कुछ घंटे चलने के बाद ही खराब हो गया। ग्रामीणों की मेहनत की कमाई भी खर्च हो गई और समस्या जस की तस बनी रही। अब ग्रामीणों का सवाल है कि जब ट्रांसफार्मर कुछ ही घंटे में खराब हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

मंत्री का काफिला रोककर अधिकारियों के सामने रखी पीड़ा

गांव में आयोजित जन विश्वास कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और प्रशासनिक अधिकारियों का काफिला जब गांव से गुजर रहा था, तभी आक्रोशित ग्रामीणों ने उसे रोक लिया। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं सीधे मंत्री के सामने रखीं। उनका कहना था कि कई दिनों से बिजली संकट झेलने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि गांव में बिजली व्यवस्था का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। मौके पर मौजूद अधिकारियों और मंत्री ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं तथा बिजली विभाग की लापरवाही की जांच कराने और जल्द नया ट्रांसफार्मर लगवाकर व्यवस्था सुचारू करने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ।

बिजली कंपनी ने बकाया राशि को बताया वजह, तकनीकी खराबी पर बदलने का भरोसा

मामले में बिजली कंपनी की अधीक्षण यंत्री पूनम तुमराम ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में बिजली बिल की बकाया राशि होने के कारण ट्रांसफार्मर बदलने की पात्रता नहीं बन रही थी। नियमानुसार उपभोक्ताओं द्वारा राशि जमा किए जाने के बाद ट्रांसफार्मर बदला गया। उन्होंने कहा कि यदि ट्रांसफार्मर लगाने के बाद तकनीकी कारणों से दोबारा खराब हुआ है तो नियमानुसार उसे फिर से बदला जाएगा।

हालांकि, ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर उन्हें निर्बाध बिजली कब मिलेगी? क्या विभाग इस बार ऐसा ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा पाएगा, जिससे गांव की समस्या का स्थायी समाधान हो सके? फिलहाल ग्रामीणों को अधिकारियों के आश्वासन पर भरोसा करना पड़ा है, लेकिन बिजली व्यवस्था बहाल होने के बाद ही विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक दावों की असली परीक्षा होगी।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...

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