सीहोर की नन्ही वान्या का बड़ा कमाल, ढाई साल की उम्र में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया अपना नाम

सीहोर। उम्र महज ढाई साल... आंखों में मासूमियत, चेहरे पर खिलखिलाती मुस्कान और दिमाग में ऐसी तेज याददाश्त कि बड़े-बड़े भी हैरान रह जाएं। सीहोर की नन्ही वान्या सचदेव ने अपनी असाधारण प्रतिभा से न केवल परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। सीवन लाइफ कॉलोनी निवासी वान्या सचदेव ने महज 2 वर्ष 6 माह की उम्र में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में IBR Achiever के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है। संस्था ने इस उपलब्धि को 13 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से कन्फर्म किया।
नन्ही उम्र में बड़ा कारनामा
वान्या ने इतनी कम उम्र में अपनी तेज स्मरण शक्ति, सीखने की क्षमता और अद्भुत जिज्ञासा का परिचय देते हुए कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के अनुसार वान्या ने 13 फलों को देखकर उनके नाम बताए, 15 जानवरों की पहचान की और मानव शरीर के 20 अंगों की सही पहचान कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।
आकृतियों से लेकर अंग्रेजी राइम तक
वान्या की प्रतिभा केवल पहचान तक सीमित नहीं रही। उसने 7 विभिन्न आकृतियों की पहचान करने के साथ एक अंग्रेजी नर्सरी राइम का स्पष्ट वाचन भी किया। इतनी छोटी उम्र में शब्दों को याद रखने और उन्हें सही तरीके से बोलने की उसकी क्षमता ने परिवार के साथ-साथ रिकॉर्ड संस्था का भी ध्यान आकर्षित किया।
सात जानवरों की आवाज की हूबहू नकल
वान्या की उपलब्धियों में सबसे खास और आकर्षक पहलू उसकी आवाज की नकल करने की क्षमता रही। उसने 7 अलग-अलग जानवरों की आवाजों की हूबहू नकल करके अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उसकी इस कला ने देखने-सुनने वालों को हैरान कर दिया और यही असाधारण प्रदर्शन उसकी रिकॉर्ड उपलब्धि का हिस्सा बना।
दादा की आंखों में खुशी, परिवार में जश्न
वान्या के दादा जगदीश सचदेव ने बताया कि उनकी पोती का जन्म 22 जनवरी 2024 को सीहोर में हुआ था। इतनी छोटी उम्र में वान्या ने जो उपलब्धि हासिल की है, उससे पूरा परिवार बेहद खुश और गौरवान्वित है। दादा ने कहा कि पोती की इस सफलता ने परिवार की खुशियों को कई गुना बढ़ा दिया है।
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एक बार देखती है, तो याद कर लेती है
वान्या के पिता आनंद सचदेव के अनुसार उनकी बेटी बचपन से ही बेहद जिज्ञासु प्रवृत्ति की रही है। वह किसी चीज को एक बार देखती या सुनती है तो उसे जल्दी ग्रहण कर लेती है। परिवार ने उसकी रुचि को समझते हुए लगातार प्रोत्साहित किया और अभ्यास के लिए सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराया।
परिवार की मेहनत और संस्कार बने ताकत
वान्या की इस सफलता के पीछे उसकी प्राकृतिक प्रतिभा के साथ परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। माता-पिता ने उसकी जिज्ञासाओं को दबाने के बजाय उन्हें सीखने का अवसर दिया। परिवार के संस्कार, निरंतर अभ्यास और प्रोत्साहन ने उसकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीहोर के लिए गर्व का क्षण
ढाई साल की उम्र में राष्ट्रीय स्तर की रिकॉर्ड संस्था में नाम दर्ज होना निश्चित रूप से सीहोर के लिए भी गर्व का विषय है। वान्या की उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा को उम्र की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। सही प्रोत्साहन और अवसर मिले तो नन्हे बच्चे भी अपनी असाधारण क्षमता से दुनिया को चौंका सकते हैं।
बच्चों के लिए बनी प्रेरणा
वान्या सचदेव की यह उपलब्धि उसके परिवार की खुशी से आगे बढ़कर जिले के लिए प्रेरणा बन गई है। शहर के सामाजिक, व्यापारिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने नन्ही प्रतिभा को शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। वान्या की यह छोटी-सी उम्र में बड़ी उपलब्धि निश्चित ही आने वाले समय में उसकी नई उड़ान की शुरुआत है।




















