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कागजों में बच्चे, जमीन पर गायब! वजन से पोषण तक गड़बड़ी; सीहोर ग्रामीण की परियोजना अधिकारी प्रियंका दीवान निलंबित

सीहोर ग्रामीण की आंगनवाड़ियों में फर्जी उपस्थिति, वजन के आंकड़ों में हेरफेर, कुपोषण रिकॉर्ड की गड़बड़ी और घटिया भोजन उजागर हुआ। निरीक्षण के 24 दिन बाद परियोजना अधिकारी प्रियंका दीवान पर गिरी गाज।
कागजों में बच्चे, जमीन पर गायब! वजन से पोषण तक गड़बड़ी; सीहोर ग्रामीण की परियोजना अधिकारी प्रियंका दीवान निलंबित
फाइल फोटो

सीहोर। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के नाम पर चल रहे कागजी खेल और पोषण व्यवस्था की बदहाली पर आखिरकार विभाग ने कड़ा शिकंजा कस दिया। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत हुए औचक निरीक्षण में रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच ऐसा बड़ा अंतर सामने आया कि महिला एवं बाल विकास विभाग को परियोजना अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करनी पड़ी। सीहोर ग्रामीण बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रियंका राय दीवान को निलंबित कर दिया गया है। निरीक्षण में फर्जी उपस्थिति, बच्चों के वजन में संदिग्ध बदलाव, कुपोषण के आंकड़ों में गड़बड़ी, घटिया भोजन और निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई थीं।

कागजों में 29 बच्चे, केंद्र पर पहुंचे सिर्फ 11

पचामा आंगनवाड़ी केंद्र में पोषण ट्रैकर ऐप पर 29 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन निरीक्षण के समय मौके पर महज 11 बच्चे मिले। रायपुरा नयाखेड़ा में 24 बच्चों की उपस्थिति दर्ज होने के बावजूद सिर्फ 9 बच्चे मौजूद थे। नौनीखेड़ी गुसाई में भी रिकॉर्ड में 20 बच्चे दर्ज थे, जबकि केंद्र पर केवल 9 बच्चे मिले। यह अंतर महज लापरवाही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वजन के आंकड़ों ने खोली दूसरी पोल

पचामा केंद्र में कनक नामक बच्चे का वजन एक ही सप्ताह में लगभग दोगुना दर्ज पाया गया। इसी केंद्र के पोषण ट्रैकर में 7 एमएएम बच्चे दर्ज थे, जबकि कार्यकर्ता को केवल 3 बच्चों की जानकारी थी। पडली केंद्र में कार्यकर्ता ने कुपोषित बच्चों की संख्या शून्य बताई, जबकि पोषण ट्रैकर में 1 सैम और 13 एमएएम बच्चे दर्ज पाए गए। इससे पोषण संबंधी आंकड़ों की निगरानी पर भी सवाल उठे हैं।

मीनू में दाल, थाली में गायब

नौनीखेड़ी गुसाई आंगनवाड़ी में बच्चों के भोजन के लिए दाल, सब्जी और रोटी का मीनू निर्धारित था, लेकिन निरीक्षण में सिर्फ 14 रोटी और नाममात्र की आलू की सब्जी मिली। दाल नदारद थी और भोजन की गुणवत्ता व स्वाद भी खराब पाया गया। टीएचआर पैकेटों पर निर्माण तिथि तक अंकित नहीं मिली और सामग्री का मिश्रण भी निर्धारित मानकों से मेल नहीं खाता पाया गया।

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मशीनें खराब, बिजली गायब, व्यवस्था बेहाल

जांच में केंद्रों की बुनियादी व्यवस्थाएं भी बदहाल मिलीं। नौनीखेड़ी गुसाई में बच्चों का वजन और ऊंचाई मापने वाली डिजिटल मशीनें खराब थीं। पडली केंद्र में टीवी और वॉटर प्यूरीफायर होने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं था। थूनाकलां केंद्र में झाड़ियां उगी मिलीं, जबकि नल और हैंडपंप भी खराब स्थिति में पाए गए।

भुगतान व्यवस्था पर भी उठे सवाल

सांझा चूल्हा योजना के तहत स्व-सहायता समूहों को भुगतान से जुड़ी फाइलें निर्धारित 15 तारीख के बाद प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई। इतना ही नहीं, काम नहीं करने वाले समूहों के खिलाफ भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। विभाग ने इन मामलों को परियोजना अधिकारी की मॉनिटरिंग और पर्यवेक्षण में गंभीर चूक माना।

24 दिन बाद चला निलंबन का डंडा

महिला एवं बाल विकास विभाग की कमिश्नर निधि निवेदिता ने 14 अगस्त को सीहोर जिले की ग्रामीण आंगनवाड़ियों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में सामने आई गड़बड़ियों की जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद मंगलवार को करीब 24 दिन बाद परियोजना अधिकारी प्रियंका राय दीवान के निलंबन की कार्रवाई हुई। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है।

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अधिकारी ने की निलंबन की पुष्टि

महिला एवं बाल विकास अधिकारी ज्ञानेश खरे ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की कमिश्नर निधि निवेदिता के आदेश पर सीहोर ग्रामीण बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रियंका राय दीवान को निलंबित किया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों में सामने आई अनियमितताओं ने विभागीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...Read More

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