सीहोर: शारदीय नवरात्र पर मरीह माता मंदिर में भव्य आयोजन, नवमी पर हजारों भक्तों के लिए विशाल भंडारा

सीहोर। शहर के विश्रामघाट स्थित प्रसिद्ध मरीह माता मंदिर में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार से शुरू हो रहे नौ दिवसीय शक्ति उपासना पर्व के दौरान मंदिर में अखंड ज्योत प्रज्वलित रहेगी। प्रतिदिन हवन-पूजन, आरती और मां दुर्गा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। महाष्टमी पर परंपरानुसार रात्रि 12 बजे महानिशा आरती होगी जबकि नवमी के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और मंदिर में नौ दिनों तक भक्तिमय माहौल रहेगा।
नौ दिन अखंड ज्योत, प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना
मरीह माता मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी नवरात्र पर्व धार्मिक परंपराओं और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। नौ दिनों तक अखंड ज्योत प्रज्वलित कर मां भगवती की आराधना की जाएगी। सुबह हवन-पूजन के बाद आरती होगी और प्रतिदिन देवी का नित नवीन श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर के व्यवस्थापक गोविन्द मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा और उमेश दुबे सहित श्रद्धालुओं ने पर्व की तैयारियों को लेकर विचार-विमर्श किया।
महाष्टमी पर आधी रात को होगी महानिशा आरती
नवरात्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में महाष्टमी की महानिशा आरती विशेष महत्व रखती है। मरीह माता मंदिर में परंपरानुसार रात्रि 12 बजे आरती की जाएगी। इस दौरान मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नवमी पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
पितृ मोक्ष अमावस्या पर कन्या पूजन और हवन
नवरात्र की तैयारियों के बीच शनिवार को मंदिर परिसर में अखिल भारतीय मारवाड़ी मंडल के तत्वावधान में पितृ मोक्ष अमावस्या पर कन्या पूजन और हवन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मंदिर के व्यवस्थापक रोहित मेवाड़ा, मंडल की अध्यक्ष श्रीमती मंजु शैलेश अग्रवाल सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की गई।
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मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की होगी आराधना
जिला संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शारदीय नवरात्र मां दुर्गा के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। नौ दिनों तक मां भवानी के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ होता है। भक्त अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार व्रत का संकल्प लेते हैं तथा मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करते हैं।
कलश स्थापना में गणेश पूजन का विधान
मनोज दीक्षित मामा के अनुसार, हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा का विधान है। कलश स्थापना के दौरान पूजा स्थल को स्वच्छ कर कलश स्थापित किया जाता है। परंपरा के अनुसार कलश को जल, सिक्कों और अन्य पूजन सामग्री से तैयार कर फूलों तथा आम के पत्तों से सजाया जाता है। इसके बाद देवी-देवताओं का आवाहन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और मां की आरती की जाती है। मरीह माता मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक आयोजनों के साथ शारदीय नवरात्र का उत्साह दिखाई देगा। महाष्टमी की महानिशा आरती और नवमी के विशाल भंडारे पर श्रद्धालुओं की विशेष सहभागिता रहने की उम्मीद है।




















