भोपाल में डॉ. अंजुम बाराबंकवी पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन, मुशायरे में जुटे शायर
भोपाल। कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग ने डॉ. अंजुम बाराबंकवी के एक शेर के जरिए अपनी बात रखी साहित्य और उर्दू से अपने पारिवारिक रिश्ते को याद किया। उन्होंने अपने पिता कैलाश सारंग के उर्दू अखबार अयाज़ का भी जिक्र किया। इसके बाद मुशायरे में वरिष्ठ और युवा शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
भोपाल की अदबी दुनिया की तारीफ
मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि भोपाल के साहित्यकारों और अदब को समझने वालों की गहराई बड़े तालाब से भी ज्यादा है। इस शहर ने दुनिया के अदब को कई बड़ी शख्सियतें दी हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में भोपाल का परचम लहराया है। डॉ. अंजुम बाराबंकवी पर केंद्रित पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री का अंदाज भी साहित्यिक नजर आया।
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डॉ. अंजुम के शेर से शुरू की बात
विश्वास सारंग ने अपनी बात की शुरुआत डॉ. अंजुम बाराबंकवी के एक शेर से की। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के समय भी उन्होंने यह शेर सुनाया था। शेर का इतना असर था कि उन्हें अपने वक्तव्य में कुछ और कहने की जरूरत नहीं पड़ी।
चंद शब्दों में बड़ी बात कहने की ताकत
मंत्री सारंग ने कहा कि शायर चंद शब्दों में वह बात कहने में कामयाब हो जाते हैं, जिसे कहने के लिए महाग्रंथ भी कम पड़ जाए। उन्होंने साहित्य और उर्दू से अपने गहरे पारिवारिक रिश्ते का भी जिक्र किया। अपने पिता कैलाश सारंग को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वे उर्दू अखबार अयाज़ प्रकाशित किया करते थे और उर्दू से उनके गहरे जुड़ाव के चलते उन्हें मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी का चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया था।
पसंदीदा गजल से हुआ मुशायरे का आगाज
डॉ. अंजुम बाराबंकवी ने अपनी सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली गजल से मुशायरे की शुरुआत की। कार्यक्रम की निजामत कर रहे डॉ. महताब आलम ने खूबसूरत लफ्जों में महफिल को बांधे रखा। अदब की महफिलों की नई शुरुआत के तौर पर कविराज विजय तिवारी को उनके वरिष्ठता क्रम को दरकिनार करते हुए पहली पंक्ति में ही श्रोताओं के सामने जगह दी गई।
वरिष्ठ और युवा शायरों ने बांधा समां
मुशायरा जब उरूज पर पहुंचा तो श्रोताओं को डॉ. शाहिद अंजुम, जौहर कानपुरी और डॉ. अंबर आबिद जैसे वरिष्ठ शायरों को सुनने का मौका मिला। वहीं, औरंगजेब आलम जैसे युवा शायरों ने भी अपनी रचनाओं से महफिल में मौजूद लोगों से राब्ता कायम किया। देर रात तक चली इस साहित्यिक महफिल में पीर बादशाह मियां, हाजी मोहम्मद हारून और मुस्तकीम बैग सहित कई मेहमान मौजूद रहे।






















