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शिक्षा के मंदिर में फर्जीवाड़े का खेल ! बिना पढ़े ही बच्चे को कक्षा 5वीं में पहुंचाने का आरोप

बड़वानी के राजपुर में सरकारी स्कूल में फर्जी एडमिशन का आरोप। इंदौर में पढ़ रहे बच्चे को कक्षा पांच तक पास दिखाने की शिकायत जनसुनवाई में की गई।
शिक्षा के मंदिर में फर्जीवाड़े का खेल ! बिना पढ़े ही बच्चे को कक्षा 5वीं में पहुंचाने का आरोप

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर में सरकारी स्कूल में फर्जी एडमिशन और मैपिंग का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम बूदरा के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में ऐसे बच्चे का दाखिला दर्ज किया गया, जो अपने अभिभावकों के साथ इंदौर में रहता है और वहां के एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। शिकायत के अनुसार, बच्चे को बड़वानी के स्कूल में लगातार पास दिखाते हुए कक्षा पांच तक पहुंचा दिया गया। मामले में बच्चे के चाचा ने जनसुनवाई में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

इंदौर में पढ़ रहा बच्चा, बड़वानी के स्कूल में दर्ज नाम

मामला बड़वानी जिले के राजपुर क्षेत्र के ग्राम बूदरा स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय का है। यह स्कूल आदिवासी जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित है। यहां पदस्थ शिक्षक पंछीलाल बरौडे पर रौशन सोलंकी का फर्जी एडमिशन करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, रौशन सोलंकी इस क्षेत्र में नहीं रहता, बल्कि अपने अभिभावकों के साथ इंदौर में रहता है। वह इंदौर के सिटी कॉन्वेंट स्कूल में कक्षा तीसरी में पढ़ाई कर रहा है। इसके बावजूद उसका नाम बड़वानी के सरकारी स्कूल में दर्ज होने और उसे लगातार उत्तीर्ण दिखाकर कक्षा पांच तक पहुंचाने का आरोप है।

बच्चे के चाचा ने जनसुनवाई में की शिकायत

इस मामले में रौशन सोलंकी के चाचा कमल सोलंकी ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कथित फर्जी एडमिशन और मैपिंग के मामले में कार्रवाई की मांग की है। साथ ही शिक्षक पंछीलाल बरौडे और जिला शिक्षा अधिकारी को निलंबित करने की मांग भी की है। शिकायत के जरिए सरकारी स्कूल में दर्ज छात्र संख्या और बच्चे की वास्तविक पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, मामले में विभागीय जांच और आधिकारिक कार्रवाई की स्थिति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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छात्र संख्या बढ़ाने के लिए फर्जी मैपिंग का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से कथित तौर पर यह गड़बड़ी की गई। आरोप है कि शिक्षक ने फर्जी मैपिंग के जरिए बच्चे का नाम स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज कराया और उसे लगातार अगली कक्षाओं में उत्तीर्ण दिखाया। इस मामले ने सरकारी स्कूलों में दर्ज विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। आरोपों के मुताबिक, छात्र संख्या से जुड़े ऐसे मामलों का संबंध छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन, स्कूल ड्रेस और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी हो सकता है।

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छात्रवृत्ति और मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था पर सवाल

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन और उपस्थिति के रिकॉर्ड के आधार पर विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जाता है। ऐसे में यदि किसी विद्यार्थी का नाम गलत तरीके से दर्ज किया जाता है या उसे बिना वास्तविक पढ़ाई के अगली कक्षा में उत्तीर्ण दिखाया जाता है, तो सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। बड़वानी के राजपुर क्षेत्र के इस मामले में भी छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन, स्कूल ड्रेस और अन्य योजनाओं में संभावित गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह पुष्टि नहीं हुई है कि इन योजनाओं के तहत किसी तरह की राशि या लाभ का गलत इस्तेमाल हुआ है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

Amit Sen
By Amit Sen

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