“पार्वती, रावण और परशुराम ने भी शिव को समर्पित किया जल, आज भक्त निभा रहे वही परंपरा” : पं. प्रदीप मिश्रा

सीहोर। सीहोर की पावन धरती पर 25 अगस्त को शिवभक्ति का अद्भुत और भावपूर्ण दृश्य देखने को मिलेगा। सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वर धाम तक निकलने वाली भव्य कांवड़ यात्रा में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और मनोकामना का भाव लेकर शामिल होंगे। सुबह से ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय होने की उम्मीद है।
सुबह 9 बजे कांवड़ लेकर चलेंगे पंडित प्रदीप मिश्रा
मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक और कुबेरेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित प्रदीप मिश्रा स्वयं सुबह 9 बजे सीवन नदी के तट से कांवड़ लेकर पैदल यात्रा में शामिल होंगे। वे सीवन नदी से जल लेकर करीब 11 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कुबेरेश्वरधाम पहुंचेंगे और भगवान शिव को जल अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
सीवन के जल से महादेव को समर्पित होगा आस्था का भाव
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कांवड़ यात्रा के धार्मिक महत्व को बताते हुए कहा कि सिद्धपुर नगर सीहोर की यह पवित्र कांवड़ मां सीवन के तट से चलकर बाबा कुबेरश्वर के धाम पहुंचती है। यहां कंकर-शंकर की पूजा के साथ श्रद्धालु देवाधिदेव महादेव को अपनी कामना का कांवड़ जल समर्पित करते हैं। उनके अनुसार यह जल केवल जल नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था, भावना और मनोकामना का प्रतीक है।
पार्वती, रावण और परशुराम की शिवभक्ति का स्मरण
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकार माता पार्वती ने भगवान शिव को जल समर्पित किया, लंकापति रावण ने भगवान शंकर को समर्पित किया और भगवान परशुराम ने भी शिव को जल अर्पित किया, उसी भाव से आज श्रद्धालु महादेव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। उनका कहना है कि देश-विदेश से आने वाले भक्त सनातन धर्म की मजबूती और भगवान शिव के प्रति अपने मन के भाव को समर्पित करने के लिए इस कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं।
सावन के अंतिम सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब
सावन मास के अंतिम सोमवार को लेकर कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही। सोमवार दोपहर तक करीब चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं के धाम पहुंचने की जानकारी सामने आई। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरे क्षेत्र का वातावरण शिवमय नजर आया।
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सीवन तट से धाम तक गूंजते रहे जयकारे
शहर के सीवन नदी तट से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। जगह-जगह हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दे रहा है। 25 अगस्त की यात्रा में भी बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है।
होटल और धर्मशालाएं हुईं फुल
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या का असर सीहोर शहर और आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। शहर सहित आसपास की होटल, धर्मशाला और होम स्टे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के ठहरने से अधिकांश स्थान भर चुके हैं। इससे साफ है कि कुबेरेश्वरधाम की कांवड़ यात्रा अब केवल स्थानीय आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि देशभर के शिवभक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है।
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देश-विदेश के भक्तों को जोड़ती है कांवड़
पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार सिद्धपुर नगर सीहोर की कांवड़ में देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं और सीवन नदी का जल भगवान शिव को अर्पित करते हैं। 25 अगस्त को एक बार फिर सीवन से कुबेरेश्वरधाम तक आस्था की यह यात्रा हजारों कदमों को एक दिशा में जोड़ेगी। श्रद्धा से उठने वाला हर कदम और महादेव को अर्पित होने वाली हर बूंद भक्तों के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक बनेगी।





















