बलराम जयंती पर किसानों का कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन, चार गुना मुआवजे समेत कई मांगों को लेकर सरकार को घेरा

सीहोर। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष कचरू परमार, प्रदेश उपाध्यक्ष बाबूलाल पाटीदार, जिला मंत्री धर्म सिंह बेशानिया, जिला संरक्षक कन्हैया लाल ईटावदिया और जिला युवा संयोजक अरविन्द ठाकुर के नेतृत्व में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और शासन-प्रशासन से कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
चार गुना मुआवजे की मांग
ज्ञापन में शासकीय और अर्धशासकीय परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण होने पर जमीन मालिकों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। किसानों का कहना है कि घोषणा के बावजूद कई हितग्राहियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। महासंघ ने नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
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बिजली लाइनों और टावरों पर भी सवाल
किसानों ने हाईटेंशन टावर, विद्युत लाइन, पाइपलाइन, केबल लाइन, सड़क और रेलवे परियोजनाओं से कृषि भूमि प्रभावित होने का मुद्दा उठाया। विशेष परिस्थितियों में कृषि भूमि का उपयोग होने पर उसे अधिग्रहित मानकर चार गुना मुआवजा देने की मांग की गई। हाईटेंशन टावरों के लिए अलग-अलग निर्धारित मापदंडों के अनुसार मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने की बात भी कही गई।
फसल का लाभकारी मूल्य देने की मांग
महासंघ ने भावांतर योजना पर सवाल उठाते हुए किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग की। धान, सोयाबीन, कपास और मक्का सहित प्रमुख फसलों का उत्पादन समर्थन मूल्य पर निर्धारित मात्रा के अनुसार उचित समय पर खरीदने की मांग ज्ञापन में शामिल रही।
दूध उत्पादकों की भी उठाई आवाज
दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए दूध का भाव 12 रुपये प्रति फैट करने और प्रदेश सरकार द्वारा घोषित 5 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि का जल्द भुगतान करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि घोषित राशि का लाभ पात्र किसानों तक समय पर पहुंचना चाहिए।
फसल बीमा में विसंगतियों की जांच की मांग
ज्ञापन में दो कृषि सत्रों की फसल बीमा राशि में कथित विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने वास्तविक नुकसान और दर्ज आंकड़ों के आधार पर बीमा राशि वितरित करने और पूर्व में वितरित बीमा राशि की जांच कराने की मांग की। वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा से वंचित किसानों को भी तत्काल लाभ देने की मांग की गई।
खाद के लिए ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग
किसानों ने उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली को दोषपूर्ण बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। उनका कहना है कि फसल की आवश्यकता के अनुसार उचित मात्रा में खाद समय पर और उचित मूल्य पर शासकीय केंद्रों से उपलब्ध होना चाहिए। कीटनाशक, खरपतवारनाशक, उर्वरक और मिट्टी की गुणवत्ता जांच के लिए प्रत्येक जिले में प्रयोगशाला स्थापित करने की मांग भी रखी गई।
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12 घंटे दिन में कृषि बिजली की मांग
किसानों ने सिंचाई के लिए दिन के समय लगातार 12 घंटे कृषि विद्युत उपलब्ध कराने की मांग की। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, टूटे बिजली पोल और झूलते तार तत्काल दुरुस्त करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिना सूचना बिजली कटौती बंद कर समान विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
जंगली पशुओं से फसल नुकसान का मुआवजा
महासंघ ने जंगली पशुओं से होने वाले फसल नुकसान को गंभीर समस्या बताते हुए किसानों को मुआवजा देने की मांग की। किसानों का कहना है कि वन्यजीव किसानों के खेतों में आने पर नुकसान की भरपाई की व्यवस्था होनी चाहिए तथा ऐसी परिस्थितियों में किसानों पर अनावश्यक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
भू-अभिलेखों की त्रुटियां सुधारने की मांग
ज्ञापन में बंदोबस्त के दौरान हुई कथित त्रुटियों को शासकीय स्तर की गलती मानकर सामूहिक रूप से सुधारने की मांग की गई। किसानों ने बताया कि कई मामलों में खसरा नंबर, रकबा और भूमि संबंधी विवरण में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इन्हें तत्काल दुरुस्त करने की मांग की गई।
आगजनी और प्राकृतिक आपदा में राहत की मांग
प्राकृतिक आपदा और आगजनी से प्रभावित किसानों को आरबीसी 6/4 के प्रावधानों के तहत राहत राशि देने तथा नुकसान के अनुसार फसल बीमा का लाभ दिलाने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि आपदा की मार झेल चुके किसानों को राहत के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ने चाहिए।
परीक्षा केंद्रों पर महिलाओं की तलाशी का मुद्दा
महासंघ ने प्रतियोगी परीक्षाओं में महिला अभ्यर्थियों के मंगलसूत्र, बिंदी, कान की बालियां आदि श्रृंगार सामग्री हटाए जाने की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। इसे अनुचित बताते हुए परीक्षा केंद्रों पर महिलाओं की गरिमा का ध्यान रखते हुए व्यवस्था में बदलाव की मांग की गई।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के अंत में महासंघ ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी कि किसानों की मांगों का समय सीमा में निराकरण नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा। इस दौरान नारायण सिंह ठाकुर, सुखराम विश्वकर्मा, लाड़ सिंह, भानूप्रताप पाटीदार, कैलाशचंद्र वर्मा, अशोक पाटीदार, विक्रम सिंह पटेल, देवकरण परमार, विष्णु जलोदिया सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं किसान मौजूद रहे।




















