SCO समिट 2027 :क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? BRICS सम्मेलन से पहले तेज हुई कूटनीतिक चर्चा

पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। वहीं, सितंबर में नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन में शी जिनपिंग की संभावित यात्रा ने भारत, चीन और पाकिस्तान के कूटनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? BRICS सम्मेलन से पहले तेज हुई कूटनीतिक चर्चा

नई दिल्ली। भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर संकेत दिए हैं कि वह वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा।

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान जाएंगे या नहीं इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन सितंबर 2026 में नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन और उसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित यात्रा के बीच इस मुद्दे ने नई राजनीतिक और कूटनीतिक बहस छेड़ दी है।

पाकिस्तान ने क्या कहा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में साफ किया कि SCO के नियमों और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश का दायित्व है कि वह सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को आमंत्रित करे। प्रवक्ता ने कहा कि, 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले सम्मेलन में भारत समेत सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की ओर से अभी तक किसी विशेष बैठक या सम्मेलन में भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

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जयशंकर-पाकिस्तान मुलाकात पर क्या बोला इस्लामाबाद?

मनीला में ASEAN और ARF बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बीच संभावित मुलाकात को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से किसी बैठक के अनुरोध की जानकारी नहीं है, इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।

क्यों अहम है BRICS सम्मेलन?

12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़े वैश्विक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। चर्चा इस बात की भी है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब छह साल बाद भारत आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं होगी, बल्कि भारत-चीन संबंधों के लिए बड़ा संकेत माना जाएगा। अक्टूबर 2019 में महाबलीपुरम शिखर सम्मेलन के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा हो सकती है।

PM Modi

गलवान के बाद बदले भारत-चीन रिश्ते

साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के संबंधों में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकातें केवल बहुपक्षीय मंचों तक सीमित रहीं। हालांकि, अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। इसके बाद 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित SCO सम्मेलन में भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। अगर शी जिनपिंग सितंबर में भारत आते हैं तो सीमा विवाद, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

क्या पाकिस्तान जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी?

फिलहाल इस सवाल का कोई आधिकारिक जवाब नहीं है। पाकिस्तान की ओर से निमंत्रण भेजने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन भारत उस निमंत्रण को स्वीकार करेगा या नहीं, यह 2027 के राजनीतिक, सुरक्षा और कूटनीतिक हालात पर निर्भर करेगा। भारत किसी भी फैसले से पहले कई रणनीतिक पहलुओं पर विचार करेगा।

SCO summit

क्या है SCO और क्यों है यह भारत के लिए महत्वपूर्ण?

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को चीन की राजधानी बीजिंग में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, आर्थिक विकास और राजनीतिक स्थिरता को बढ़ावा देना है।

SCO के 10 सदस्य देश

क्रमांक

देश

1

भारत

2

चीन

3

रूस

4

पाकिस्तान

5

कजाकिस्तान

6

किर्गिस्तान

7

ताजिकिस्तान

8

उज्बेकिस्तान

9

ईरान

10

बेलारूस

SCO की मेजबानी कैसे तय होती है?

SCO के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय 'काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट' (CHS) की अध्यक्षता हर साल सदस्य देशों के बीच वर्णानुक्रम (Alphabetical Order) के आधार पर बदलती है। जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही उस वर्ष शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।

भारत के लिए SCO क्यों अहम है?

भारत के लिए SCO सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय मंच नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण संगठन है। इस मंच के जरिए भारत को-

  • चीन और रूस के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलता है।
  • मध्य एशियाई देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत होते हैं।
  • आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ता है।
  • ऊर्जा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर चर्चा होती है।
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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