जयपुर। राजस्थान में स्कूली बच्चों के नामों को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है, जिसे 'सार्थक नाम अभियान' नाम दिया गया है। इस अभियान का मकसद स्कूल रजिस्टर में दर्ज ऐसे नामों को बदलना है, जो अटपटे, अपमानजनक या मजाक का कारण बनते हैं। 'शेरू', 'घसीटा', 'शैतान' 'कालू' जैसे नामों को उदाहरण मानते हुए शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि बच्चों की पहचान सकारात्मक और सम्मानजनक होनी चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का मानना है कि जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, ऐसे नाम कभी-कभी शर्मिंदगी का कारण बनते हैं और उनके आत्मसम्मान को प्रभावित कर सकते हैं। नाम बच्चे की पहचान और व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में नाम अनजाने में या सामाजिक कारणों से रखे जाते हैं, लेकिन बाद में बच्चे हीनभावना महसूस करने लगते हैं।
अभियान के तहत शिक्षा विभाग ने सरकारी और निजी स्कूलों में करीब 2,000 से 3,000 ऐसे नामों की पहचान की है, जिन्हें बदलने की जरूरत महसूस की गई। इसके साथ ही लगभग 3,000 सार्थक और सकारात्मक नामों की सूची तैयार की गई है। इस सूची में लड़कियों के लिए 1,541 और लड़कों के लिए 1,409 नाम शामिल हैं, जिनके अर्थ भी दिए गए हैं, ताकि अभिभावक सोच-समझकर विकल्प चुन सकें।
विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे छात्रों की पहचान करें और अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित करें। इसके लिए अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) और विद्यालय प्रबंधन समितियों को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा गया है। अधिकारियों का मानना है कि नकारात्मक या अटपटे नाम बच्चों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए समय रहते बदलाव जरूरी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जाति-आधारित या अपमानजनक शब्दों को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाना आवश्यक है। नए दाखिले के समय अभिभावकों को सुझाए गए नामों में से चयन का विकल्प मिलेगा, जबकि पहले से नामांकित छात्र निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम बदलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस अभियान की निगरानी वरिष्ठ अधिकारी करेंगे और समय-समय पर इसकी प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि हर बच्चे को सम्मानजनक पहचान मिल सके।