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भोपाल में टी. राजा की सभा पर विवाद:हाईकोर्ट ने तत्काल राहत से किया इनकार, सरकार से मांगा जवाब

भोपाल में हैदराबाद के विधायक टी. राजा सिंह के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा। याचिका पर सुनवाई करते हुए वेकेशन बेंच ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को एक दिन में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली स
हाईकोर्ट ने तत्काल राहत से किया इनकार, सरकार से मांगा जवाब
टी. राजा।

जबलपुर। भोपाल में हैदराबाद के विधायक टी. राजा सिंह के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस विवेक जैन कर रहे थे, उन्होंने कहा कि जब तक सरकार का पक्ष पूरी तरह से सामने नहीं आ जाता, तब तक कोई भी अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा।

क्या था प्रस्तावित कार्यक्रम?

यह विवाद भोपाल के गांधीनगर बस स्टैंड इलाके में प्रस्तावित एक  कार्यक्रम से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, यह आयोजन 31 मई 2026 को होना था, जिसमें हैदराबाद के विधायक टी. राजा सिंह की धर्मसभा और स्वागत कार्यक्रम प्रस्तावित था। इस कार्यक्रम का आयोजन धर्म रक्षक मंच की ओर से किया जा रहा था। मंच के अध्यक्ष माधव सेन ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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शांतिपूर्ण आयोजन का दावा

याचिका में कहा गया है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाना था। आयोजकों का दावा है कि इसका उद्देश्य किसी भी तरह की अशांति फैलाना नहीं था, बल्कि यह केवल एक धार्मिक और सार्वजनिक कार्यक्रम था। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि प्रशासन द्वारा अनुमति रद्द करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक आयोजन के अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करते हुए कार्यक्रम की अनुमति देने का निर्देश देना चाहिए।

हाईकोर्ट में क्या हुआ?

इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अतुल जैसवानी ने अदालत के सामने दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और इसे रोका जाना अनुचित है। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता आदित्य चौबे ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े संबंधित पुलिस अधिकारी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसी कारण सरकार की रिपोर्ट अभी पेश नहीं की जा सकी। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा कि बिना सरकार का पक्ष सुने कोई भी अंतरिम आदेश देना संभव नहीं है।

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कोर्ट का सख्त रुख- पहले जवाब, फिर फैसला

जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला संवेदनशील है। ऐसे में जल्दबाजी में कोई आदेश देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करे। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई 1 जून को होगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि फिलहाल कार्यक्रम की अनुमति देने या रोकने पर कोई अंतरिम निर्णय नहीं दिया जाएगा।

प्रशासन का फैसला क्यों बना विवाद?

जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने का फैसला लिया था। हालांकि इसके पीछे के कारण सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं किए गए हैं, लेकिन आम तौर पर ऐसे मामलों में प्रशासन कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को आधार बनाकर निर्णय लेता है।

अगला कदम क्या होगा?

अब इस पूरे मामले में सरकार को कोर्ट के सामने अपना जवाब रखना होगा। उसी जवाब के आधार पर यह तय होगा कि अगली सुनवाई में अदालत क्या रुख अपनाती है। 1 जून की सुनवाई को इस मामले में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उसी दिन यह साफ हो सकता है कि कार्यक्रम को अनुमति मिलेगी या नहीं।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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