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जल संकट से सबक:अब अपने 100 टैंकर खरीदेगा निगम

गर्मी में हुए जल संकट और चक्काजाम के बाद नगर निगम की नई रणनीति, चौथे चरण की परियोजना पूरी होने तक अपने टैंकरों से संभालेगा पानी वितरण।
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अब अपने 100 टैंकर खरीदेगा निगम
फाइल फोटो

इंदौर में इस वर्ष के जल संकट ने नगर निगम की पानी वितरण व्यवस्था की कई खामियां उजागर कर दीं। करोड़ों रुपये खर्च कर 500 से अधिक किराए के टैंकर लगाने के बावजूद शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत, टैंकरों की मनमानी और पानी बेचने की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। अब निगम ने इससे सबक लेते हुए अपने स्तर पर 100 से अधिक नए टैंकर खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में नगर निगम के पास करीब 90 छोटे और बड़े टैंकर हैं, लेकिन गर्मियों में बढ़ती मांग को देखते हुए हर साल सैकड़ों टैंकर निजी एजेंसियों से किराए पर लेने पड़ते हैं। इसके बदले निगम करोड़ों रुपये का भुगतान करता है, फिर भी व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाती।

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हर साल करोड़ों का किराया, फिर भी राहत नहीं

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में 500 से अधिक टैंकर पानी वितरण के लिए अटैच किए गए हैं। बड़े टैंकरों का किराया प्रतिदिन करीब 5500 रुपये और छोटे ट्रैक्टर टैंकरों का किराया 2500 रुपये तक दिया जाता है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों से पानी नहीं पहुंचने, टैंकरों की कमी और पानी बेचने जैसी शिकायतें लगातार मिलती रहती हैं। इस बार गर्मियों में शहर के कई इलाकों में जल संकट को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम तक हुए। कई जगह टैंकर उपलब्ध थे, लेकिन बोरिंग और जलस्रोतों की स्थिति खराब होने से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया।

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चौथे चरण की योजना पूरी होने में अभी समय

नगर निगम नर्मदा परियोजना के चौथे चरण के तहत नई टंकियों और जल वितरण नेटवर्क पर काम कर रहा है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना वर्ष 2029-30 तक पूरी होने की संभावना है। तब तक हर गर्मी में संकट की स्थिति न बने, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम शुरू किया गया है।इसी के तहत निगम अब अपने 100 से अधिक नए टैंकर खरीदने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इनमें छोटे ट्रैक्टर टैंकरों से लेकर बड़े क्षमता वाले टैंकर शामिल होंगे।

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20 से 40 लाख तक की लागत

अधिकारियों के मुताबिक एक छोटे ट्रैक्टर टैंकर की लागत लगभग 20 से 25 लाख रुपये तक आती है, जबकि बड़े टैंकरों की कीमत 35 से 40 लाख रुपये तक होती है। निगम का मानना है कि एक बार पूंजीगत निवेश करने के बाद हर साल किराए पर होने वाला करोड़ों रुपये का खर्च कम होगा।

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पानी बिक्री पर भी लगेगी रोक

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि निजी एजेंसियों के टैंकरों में निगरानी सबसे बड़ी चुनौती रहती है। कई बार पानी बेचने और निर्धारित क्षेत्र से बाहर सप्लाई करने की शिकायतें भी सामने आती हैं। यदि निगम के अपने टैंकर होंगे और निगम कर्मचारी ही पानी वितरण करेंगे तो ऐसी गड़बड़ियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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किराए के टैंकरों पर सख्त नियम

फिलहाल निगम द्वारा अटैच किए गए टैंकरों को प्रतिदिन कम से कम पांच फेरे लगाना अनिवार्य है। साथ ही उन्हें आठ घंटे तक पानी वितरण का कार्य करना होता है। ड्राइवर और डीजल का खर्च संबंधित एजेंसियों को ही वहन करना पड़ता है। इसके बावजूद निगरानी और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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