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सोहागपुर:सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में दिखे सफेद सांभर और बायसन, पर्यटक कर रहे दीदार

विश्व प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिजर्व इन दिनों बाघों की दहाड़ के साथ प्रकृति के एक दुर्लभ चमत्कार को लेकर भी चर्चा में है। जंगल सफारी पर आने वाले पर्यटक सामान्य काले रंग के इंडियन गौर और भूरे सांभर के बजाय सफेद रंग के दुर्लभ सांभर और गौर को देखकर रोमांचित हो रहे हैं। जंगल के बीच सफेद रंग में विचरण करते ये वन्यजीव पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में दिखे सफेद सांभर और बायसन

सोहागपुर। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में दिखाई दे रहे सफेद सांभर और इंडियन गौर किसी अलग प्रजाति के नहीं हैं, बल्कि यह ल्यूसिज्म (Leucism) नामक दुर्लभ आनुवांशिक स्थिति का परिणाम हैं। अधिकारियों के अनुसार यह प्राकृतिक परिवर्तन है, जिसमें शरीर में मेलेनिन की मात्रा कम होने से जानवरों का रंग सफेद दिखाई देता है। इन दुर्लभ वन्यजीवों ने जंगल सफारी का रोमांच और भी बढ़ा दिया है।

ल्यूसिज्म के कारण बदल जाता है जानवरों का रंग

एसटीआर के जनसंपर्क अधिकारी और सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े ने बताया कि यह किसी नई प्रजाति का जीव नहीं, बल्कि ल्यूसिज्म (Leucism) नामक एक दुर्लभ आनुवांशिक स्थिति का परिणाम है। इस अवस्था में शरीर के बालों या त्वचा में मेलेनिन नामक प्राकृतिक रंजक का निर्माण सामान्य से कम हो जाता है। इसी कारण जानवर का रंग सफेद और हल्का भूरा दिखाई देता है। यही वजह है कि ऐसे वन्यजीव अपने झुंड में भी अलग और बेहद आकर्षक नजर आते हैं।

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एल्बिनिज्म और ल्यूसिज्म में है अंतर

आशीष खोबरागड़े ने बताया कि कई लोग इसे एल्बिनिज्म समझ लेते हैं, जबकि दोनों स्थितियां अलग-अलग हैं। ल्यूसिज्म में जानवरों की आंखों का रंग सामान्य रहता है, जबकि एल्बिनिज्म में आंखें लाल या गुलाबी दिखाई देती हैं। ऐसे वन्यजीव अत्यंत दुर्लभ होते हैं और किसी भी जंगल की प्राकृतिक आनुवांशिक विविधता का महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं। यही कारण है कि इनका दिखाई देना वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों, दोनों के लिए खास माना जाता है।

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फील्ड डायरेक्टर ने बताया प्राकृतिक परिवर्तन

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि जानवरों के शरीर में मौजूद मेलेनिन पिगमेंट की कमी के कारण उनके बाल या त्वचा का रंग सफेद हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई अलग प्रजाति नहीं है, बल्कि प्रकृति में होने वाला एक सामान्य आनुवांशिक परिवर्तन है। ऐसी स्थिति मनुष्यों में भी देखने को मिलती है, इसलिए वन्यजीवों में भी इसका पाया जाना पूरी तरह स्वाभाविक माना जाता है।

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जैव विविधता का अनमोल खजाना है सतपुड़ा

मध्य प्रदेश का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व देश के सबसे समृद्ध वनों में गिना जाता है। यह प्रदेश के पहले बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है और अपनी समृद्ध वनस्पति, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां लगभग 8 हजार सांभर, 5,600 से अधिक इंडियन गौर, 90 से अधिक बाघ निवास करते हैं। इन दिनों जंगल सफारी के दौरान सफेद सांभर और सफेद गौर के दुर्लभ दीदार ने सतपुड़ा के रोमांच को नई पहचान दे दी है और वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों के लिए यह किसी अनमोल सौगात से कम नहीं माना जा रहा है।

Edited By: Rohit Sharma

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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