PU Special :गुना के युवा व्यापारी के परिवार को 1.90 करोड़ का बीमा क्लेम, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को भुगतान के दिए आदेश

सड़क हादसे में जान गंवाने वाले गुना के युवा व्यापारी के परिजनों को बीमा क्लेम के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। बीमा कंपनी ने हादसे के समय मृतक के कार चलाने या उसमें सवार होने को लेकर संदेह जताते हुए 1.90 करोड़ रुपए का क्लेम खारिज कर दिया था।
गुना के युवा व्यापारी के परिवार को 1.90 करोड़ का बीमा क्लेम, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को भुगतान के दिए आदेश
गुना के युवा व्यापारी के परिवार को 1.90 करोड़ का बीमा क्लेम

पल्लवी वाघेला, भोपाल। मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के निर्णय को उचित नहीं मानते हुए पॉलिसी के अनुसार 1 करोड़ 90 लाख रुपए की बीमा राशि देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने राशि दो माह के भीतर भुगतान करने को कहा है। आयोग ने कंपनी की दलील को स्वीकार नहीं किया और क्लेम खारिज करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना।

पिता थे नॉमिनी

गुना निवासी अमन ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी में सामान्य मृत्यु पर एक करोड़ और दुर्घटना में मृत्यु होने पर एक करोड़ 90 लाख रुपए का रिस्क कवर था। अमन नियमित रूप से वार्षिक प्रीमियम जमा कर रहे थे और उन्होंने पिता को पॉलिसी में नॉमिनी बनाया था।

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हादसे के बाद किया गया था क्लेम

वर्ष 2024 में अमन की कार को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल अमन की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद उनके पिता ने पॉलिसी के तहत 1.90 करोड़ रुपए के क्लेम के लिए बीमा कंपनी में आवेदन किया।

जांच में दस्तावेज सही मिले

कंपनी ने मामले की जांच के लिए निजी एजेंसी नियुक्त की। जांच रिपोर्ट में पुलिस पंचनामा, मृत्यु प्रमाण पत्र समेत उपलब्ध दस्तावेजों को सही पाया गया और क्लेम भुगतान की सिफारिश की गई। इसके बावजूद कंपनी ने 24 फरवरी 2025 को क्लेम खारिज कर दिया।

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कंपनी ने धोखाधड़ी का लगाया आरोप

कंपनी का तर्क था कि हादसे के समय अमन कार चला रहे थे या बगल की सीट पर बैठे थे, यह स्पष्ट नहीं है। कंपनी ने परिजनों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए पॉलिसी निरस्त कर दी और जमा प्रीमियम भी जब्त कर लिया। मामले की सुनवाई के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलील को स्वीकार नहीं किया।

दो माह में भुगतान के आदेश

राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के निर्णय को उचित नहीं मानते हुए इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। आयोग ने पॉलिसी के अनुसार 1 करोड़ 90 लाख रुपए की बीमा राशि देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने कंपनी को यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करने को कहा है।

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केवल संदेह के आधार पर क्लेम नहीं रोका जा सकता

उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह तोमर ने कहा कि बीमा कंपनी को क्लेम की जांच करने का अधिकार है, लेकिन जांच में दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्य घटना को सही साबित करते हैं तो केवल संदेह के आधार पर क्लेम रोकना उचित नहीं है। हादसे में किसी की मौत के बाद परिवार पहले ही कठिन परिस्थिति से गुजरता है, ऐसे में कंपनी को क्लेम खारिज करने से पहले ठोस कारण स्पष्ट करना चाहिए।

Devendra shakya
By Devendra shakya

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