PU Special :भोपाल-इंदौर मेट्रो स्टेशन अब ब्रांड के नाम से भी पहचाने जाएंगे, 23 स्टेशनों की ब्रांडिंग के अधिकार होंगे नीलाम

भोपाल और इंदौर के 23 मेट्रो स्टेशनों के सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग अधिकार तीन साल के लिए दिए जाएंगे। शराब, तंबाकू, लॉटरी और राजनीतिक प्रचार को अनुमति नहीं होगी।
भोपाल-इंदौर मेट्रो स्टेशन अब ब्रांड के नाम से भी पहचाने जाएंगे, 23 स्टेशनों की ब्रांडिंग के अधिकार होंगे नीलाम
भोपाल-इंदौर मेट्रो स्टेशन अब ब्रांड के नाम से भी पहचाने जाएंगे

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में मेट्रो संचालन के साथ अब मेट्रो स्टेशन भी कमाई का जरिया बनने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने भोपाल और इंदौर के चयनित मेट्रो स्टेशनों के सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग अधिकार देने के लिए टेंडर जारी किया है। इसके तहत कंपनियां और संस्थाएं तीन साल के लिए किसी स्टेशन के मौजूदा नाम के आगे या पीछे अपने ब्रांड का नाम जोड़ सकेंगी। ब्रांडिंग सिर्फ स्टेशन के नाम तक सीमित नहीं रहेगी। लाइसेंसधारी को स्वीकृत स्थानों पर विज्ञापन और ब्रांडिंग करने के साथ स्टेशन के प्रवेश और निकास पर लोगो लगाने की अनुमति भी होगी। इसके अलावा ट्रेन के किसी स्टेशन के पास पहुंचने पर होने वाली उद्घोषणा में भी संबंधित ब्रांड का नाम स्टेशन के नाम के पहले या बाद में लिया जा सकेगा। हालांकि पूरी ब्रांडिंग MPMRCL की मंजूरी के अधीन होगी। निगम सुरक्षा, संचालन और स्टेशन की सुंदरता से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किसी ब्रांडिंग प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकेगा।

शराब, तंबाकू और राजनीतिक प्रचार को नहीं मिलेगी अनुमति

MPMRCL ने ब्रांडिंग के लिए कुछ श्रेणियों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा है। शराब, तंबाकू, ड्रग्स, हथियार, लॉटरी और जुआ जैसे उत्पादों से जुड़े ब्रांडों को सेमी-नेमिंग या को-ब्रांडिंग अधिकार नहीं दिए जाएंगे। इसके अलावा ऐसे राजनीतिक दल, चुनावी उम्मीदवार या चुनावी समूह भी इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे, जिनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष या विरोध में प्रचार करना हो। यानी मेट्रो स्टेशन की ब्रांडिंग का इस्तेमाल चुनावी या राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा।

गैर-किराया आय बढ़ाने की योजना का हिस्सा

MPMRCL ने स्टेशन ब्रांडिंग की इस व्यवस्था को नॉन-फेयर बॉक्स रेवेन्यू बढ़ाने की योजना का हिस्सा बताया है। टेंडर दस्तावेज के मुताबिक, इसका उद्देश्य मेट्रो के संचालन से जुड़ी अतिरिक्त आय जुटाना है। ब्रांड को स्टेशन के नाम से जोड़ने के अलावा स्टेशन परिसर के अंदर विज्ञापन स्थल, कॉलम, प्रवेश-निकास संरचनाओं और अन्य स्वीकृत स्थानों पर भी ब्रांडिंग की जा सकेगी। लाइसेंसधारी को अपने ब्रांड की रंग-थीम के अनुसार स्वीकृत स्थानों पर पेंटिंग और कॉलम ब्रांडिंग की अनुमति भी मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए पहले निगम को विस्तृत ब्रांडिंग प्लान देना होगा।

भोपाल के 8 स्टेशन ब्रांडिंग के लिए उपलब्

टेंडर में भोपाल के 8 मेट्रो स्टेशनों को सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग के लिए शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं-

  • एम्स
  • अलकापुरी
  • डीआरएम ऑफिस
  • रानी कमलापति रेलवे स्टेशन
  • एमपी नगर
  • बोर्ड ऑफिस चौराहा
  • केंद्रीय विद्यालय
  • सुभाष नगर

वहीं इंदौर में गांधी नगर से मालवीय नगर चौराहा तक 15 स्टेशन इस योजना के दायरे में रखे गए हैं। इस तरह भोपाल और इंदौर को मिलाकर कुल 23 मेट्रो स्टेशनों के ब्रांडिंग अधिकार दिए जाएंगे।

स्टेशन के नाम के साथ उद्घोषणा में भी ब्रांड का नाम

इस योजना की खास बात यह है कि लाइसेंसधारी को सिर्फ स्टेशन परिसर में विज्ञापन लगाने का अधिकार नहीं मिलेगा, बल्कि स्टेशन के नाम के साथ ब्रांड का नाम जोड़ने की सुविधा भी होगी। टेंडर दस्तावेज के अनुसार स्टेशन के प्रवेश और निकास पर ब्रांड के नियॉन साइन लगाए जा सकेंगे। स्टेशन के अंदर और बाहर निगम द्वारा स्वीकृत स्थानों पर ब्रांड की रंग-थीम के अनुसार पेंटिंग और कॉलम ब्रांडिंग की जा सकती है। इसके अलावा जब ट्रेन किसी स्टेशन के पास पहुंचेगी, तब पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम में स्टेशन के नाम से पहले या बाद में संबंधित ब्रांड का नाम लिया जा सकेगा। हालांकि ब्रांडिंग का डिजाइन, स्थान, सामग्री और तरीका पहले MPMRCL को प्रस्तुत करना होगा। निगम यह देखेगा कि इससे स्टेशन की सुरक्षा, संचालन व्यवस्था और सौंदर्य प्रभावित न हो।

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हर स्टेशन के लिए 3 साल का लाइसेंस

टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रत्येक स्टेशन के लिए लाइसेंस की अवधि 3 वर्ष होगी। हर स्टेशन के लिए 60 हजार रुपये की बिड सिक्योरिटी निर्धारित की गई है, जबकि टेंडर दस्तावेज की लागत 11,800 रुपये रखी गई है। सफल बोलीदाता को प्रत्येक स्टेशन के लिए अलग-अलग लाइसेंस दिया जाएगा। जिस स्टेशन के लिए सबसे अधिक कीमत की बोली प्राप्त होगी, वह स्टेशन संबंधित सफल बोलीदाता को लाइसेंस के तहत दिया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक स्टेशन की ब्रांडिंग के लिए अलग बोली और अलग लाइसेंस की प्रक्रिया होगी।

23 स्टेशनों पर 1,150 वर्गमीटर इंडोर विज्ञापन क्षेत्र

MPMRCL ने चयनित सभी 23 स्टेशनों पर इंडोर विज्ञापन क्षेत्र का भी प्रावधान किया है। भोपाल के सभी 8 चयनित स्टेशनों में प्रत्येक स्टेशन पर 50 वर्गमीटर इंडोर विज्ञापन क्षेत्र प्रस्तावित है। इसी तरह इंदौर के सभी 15 चयनित स्टेशनों में भी प्रत्येक स्टेशन के लिए 50 वर्गमीटर इंडोर विज्ञापन क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इस तरह 23 स्टेशनों पर कुल 1,150 वर्गमीटर इंडोर विज्ञापन क्षेत्र उपलब्ध होगा। यह विज्ञापन क्षेत्र भी लाइसेंसधारी को निगम की स्वीकृत शर्तों के अनुसार ब्रांडिंग और विज्ञापन गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।

टेंडर की अहम तारीखें

MPMRCL के टेंडर में आवेदन और बोली प्रक्रिया के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित की गई हैं। 30 सितंबर तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद 5 अक्टूबर को प्री-बिड बैठक आयोजित होगी। ऑनलाइन बोली जमा करने की प्रक्रिया 22 अक्टूबर से शुरू होगी और बोली जमा करने की अंतिम तारीख 29 अक्टूबर निर्धारित की गई है।

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इसके बाद 30 अक्टूबर को तकनीकी बोली खोली जाएगी।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद चयनित बोलीदाताओं को संबंधित मेट्रो स्टेशनों के लिए तीन साल की अवधि के लिए सेमी-नेमिंग और को-ब्रांडिंग अधिकार दिए जाएंगे। मेट्रो स्टेशन के नाम के साथ ब्रांड जोड़ने की यह व्यवस्था भोपाल और इंदौर में मेट्रो के गैर-किराया राजस्व को बढ़ाने की दिशा में एक नया माध्यम होगी। इसके जरिए निगम स्टेशन परिसर में उपलब्ध विज्ञापन और ब्रांडिंग स्थानों का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हुए अतिरिक्त आय जुटाने की योजना पर आगे बढ़ रहा है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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