‘मेरा एनकाउंटर हो सकता है’, सोनम वांगचुक के बयान से फिर गरमाया लद्दाख, अमित शाह के इस्तीफे की मांग..!

लद्दाख में 2025 की हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि उन्हें एनकाउंटर में मारे जाने की चेतावनी मिली है। उन्होंने लेह हिंसा की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा देने की मांग की। वहीं, लद्दाख पुलिस ने उनके आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है।
‘मेरा एनकाउंटर हो सकता है’, सोनम वांगचुक के बयान से फिर गरमाया लद्दाख, अमित शाह के इस्तीफे की मांग..!
सोनम वांगचुक ने लद्दाख में उठाई आवाज

लेह। लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए। लेह में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ बोलने की वजह से उन्हें एनकाउंटर में मारे जाने का डर है। वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की बात कही। उस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी रखी। दूसरी ओर, लद्दाख पुलिस ने कार्यक्रम में लोगों को रोके जाने के आरोपों को खारिज किया है।

‘मुझे एनकाउंटर में मारा जा सकता है’

वांगचुक ने सभा में कहा कि उन्हें अपनी जान को लेकर चेतावनियां मिली हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनसे कहते हैं कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उनका एनकाउंटर किया जा सकता है। वांगचुक ने कहा कि अगर ऐसा होता है और इससे देश का ध्यान लद्दाख के मुद्दे की ओर जाता है, तो वह किसी भी नतीजे का सामना करने को तैयार हैं। 

अमित शाह के इस्तीफे की मांग

वांगचुक ने पिछले साल की हिंसा को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि लद्दाख में हुई मौतों की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन का मुद्दा केवल पिछले साल की हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने की मांग से भी जुड़ा है।

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जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

वांगचुक ने 2025 की हिंसा पर हुई न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सामने नहीं आने पर पुलिस फायरिंग की जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘जन न्यायाधिकरण’ बनाने की कोशिश की जाएगी। पिछले साल 24 सितंबर को राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी और 44 लोग घायल हुए थे।

राहुल गांधी का भी किया जिक्र

वांगचुक ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से अमित शाह के इस्तीफे की मांग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह इस मांग का समर्थन करते हैं, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि लद्दाख में हुई हिंसा को लेकर भी ऐसी ही आवाज क्यों नहीं उठाई गई। वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर ऑटोमेटिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। यह उनके द्वारा लगाया गया आरोप है।

लद्दाख में बंद, पुलिस ने आरोपों को नकारा

हिंसा की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद रहा। लेह और कारगिल में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम वाहन दिखाई दिए। वांगचुक ने दावा किया कि सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के कारण कार्यक्रम में कम लोग पहुंचे। हालांकि, लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को ‘झूठा, निराधार और भ्रामक’ बताया। पुलिस के मुताबिक किसी को प्रार्थना सभा में जाने से नहीं रोका गया था।

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लद्दाख के अधिकारों का मुद्दा फिर सामने

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लिए न्याय की जिम्मेदारी केवल यहां के लोगों की नहीं, बल्कि पूरे देश की है। उनका कहना है कि राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लोगों की मांग अभी भी बनी हुई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में वांगचुक की NSA के तहत हिरासत वापस लेने का फैसला किया था और लद्दाख के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों को लेकर संवाद जारी रखने की बात कही थी। 

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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